खंडवा में किसान की फसल पहले सूखे और बाद में अतिवृष्टि से बर्बाद हो गई थी, जिसके चलते वह तनाव में था और इस तरह का कदम उठा लिया। हालांकि, पुलिस इस मामले में जांच के बाद ही आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट होने की बात कह रही है।
खंडवा के पंधाना थाने के अंतर्गत आने वाले गोराड़िया गांव में रहने वाले एक आदिवासी किसान पंढरी ने गांव में ही बने एक खले में लगे नीम के पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। किसान के परिजन ने बताया कि किसान पर बैंक व समूह लोन मिलाकर करीब छह लाख रुपये का कर्ज था। उसे फसल से उम्मीद थी, लेकिन मौसम की मार ने बर्बाद कर दिया था। पंढरी ने सोयाबीन की फसल बोई थी। खेत में फसल अच्छी लहलहा रही थी कि समय पर पानी नहीं गिरा और वह सूखने लगी। समय निकलने के बाद बारिश हुई। इससे पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिसके बाद अचानक पंढरी का शव गुरुवार सुबह गांव के बाहर खले में लगे नीम के एक पेड़ पर लटकता मिला।
कर्ज के चलते था तनाव में
रातभर से लापता पिता को ढूंढते हुए किसान पंढरी का बेटा प्रदीप सुबह खले में पहुंचा तो घटना का पता चला। पंधाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमॉर्टम करवाया। टीआई संजय पाठक के अनुसार, जांच के बाद ही मौत की वजह का पता चल पाएगा। मृतक किसान पंढरी के परिवार में पत्नी राजकुमारी, बेटियां प्रतिभा, नेहा, कीर्ति व बेटा प्रदीप हैं। सभी बच्चे 18 से 24 साल तक के हैं। प्रतिभा बीएससी कर चुकी है। नेहा व कीर्ति भी बीए की पढ़ाई कर रही है। बेटियों ने बताया कि पिता पिछले पांच दिनों से परेशान थे। तनाव से निकलने के लिए शराब पी रहे थे। वे बोल रहे थे कि, जमीन पर उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया से 3 लाख का क्राप लोन लिया था।
डिप्रेशन के चलते पीने लगा शराब
दूसरों की जमीन जोती थी कि फसल की पैदावार होगी तो उसे बाजार में बेचकर समूह लोन का कर्ज उतार दूंगा। लेकिन समय पर पानी नहीं आया तो फसल सूख गई। जब पानी आया तो इतना आया कि फसल चौपट कर दी। अब मेरे पास कुछ नहीं बचा। हमने उन्हें काफी समझाया लेकिन वे डिप्रेशन में इस कदर चले गए कि पिछले पांच दिनों से शराब पी रहे थे।