मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरिहंत तिवारी भी उपस्थित रहे। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायाधीश विवेक जैन की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने केंद्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त पीठ ने रिपोर्ट में दर्शाई गई कथित अनियमितताओं, सर्वोच्च न्यायालय में चल रही कार्यवाही की वर्तमान स्थिति और उन पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
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पन्ना टाइगर रिजर्व और वन्यजीवों पर संकट
अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का आधा से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ जाएगा। याचिकाकर्ता ने वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लगभग 60 लाख पेड़ों की कटाई होने का अनुमान व्यक्त किया है। परियोजना के कारण होने वाले भारी जलभराव से बाघ, तेंदुआ और गिद्ध समेत अनेक वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो सकते हैं तथा उनके आवागमन के पारंपरिक गलियारे बाधित हो सकते हैं। याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले संभावित बुरे प्रभावों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है कि नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्थायी समिति ने निचले क्षेत्र में स्थित घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले प्रभाव का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया है। इस कारण याचिका में इसका स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन कराने का आग्रह किया गया है।
पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में आरोप है कि कई आधिकारिक तंत्रों ने इस रिपोर्ट में मौजूद तथ्यात्मक त्रुटियों की तरफ स्पष्ट संकेत किया था। इसके बावजूद नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वतंत्र जलवैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से जल संकट और सूखे का सामना कर रहा है। ऐसे में इस परियोजना के वर्तमान स्वरूप से क्षेत्र के पर्यावरण, वर्षा चक्र तथा स्थानीय जलवायु पर विपरीत असर पड़ सकता है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र के डूबने से वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।