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कटनी: गणेश उत्सव के लिए इको फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग बढ़ी, मिट्टी-बांस की मूर्तियां श्रद्धालुओं की पहली पसंद

Mon, 14 Sep 2026 12:44 PM IST
कटनी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी

सार

भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु मिट्टी, बांस और लकड़ी से बनी इको फ्रेंडली प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। कटनी में तैयार प्रतिमाएं दूसरे जिलों के लोगों को भी आकर्षित कर रही हैं।
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ईको फ्रेंडली भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करती कलाकार
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विस्तार
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गणेश उत्सव से पहले शहर में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार श्रद्धालुओं का रुझान आकर्षक प्रतिमाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी इको फ्रेंडली मूर्तियों की ओर भी बढ़ा है। मिट्टी, बांस और लकड़ी से तैयार की जा रही गणेश प्रतिमाएं कटनी के साथ दूसरे जिलों के लोगों को भी आकर्षित कर रही हैं।

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मैहर से प्रतिमा लेने कटनी पहुंचे श्रद्धालु
मैहर जिले से गणेश प्रतिमा लेने कटनी पहुंचे सत्यम जायसवाल ने बताया कि वे खासतौर पर यहां तैयार होने वाली प्रतिमा लेने आए हैं। उनके मुताबिक कटनी में मिट्टी, बांस और लकड़ी से बेहद सुंदर गणेश प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनके परिवार के लोग भी यहां से प्रतिमा लेकर जाते थे और अब वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।  कटनी के प्रतीक गुप्ता, गीता लालवानी और जीएस गौतम ने बताया कि भगवान गणेश उनके प्रथम पूज्य और आराध्य हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि गणेश उत्सव आस्था का पर्व है लेकिन इसके साथ प्रकृति की रक्षा करना भी जरूरी है। यही वजह है कि वे ऐसी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनके विसर्जन से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

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चार महीने पहले शुरू हो जाती है प्रतिमा बनाने की तैयारी
प्रतिमा निर्माता मनीष और आनंद चक्रवर्ती ने बताया कि उनके परिवार में मूर्ति निर्माण का काम दादा-परदादा के समय से पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है। भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार करने में देशी काली मिट्टी, भूसा, बांस, लकड़ी और सामान्य रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक सामग्री से तैयार प्रतिमाएं पानी में अपेक्षाकृत आसानी से घुल-मिल जाती हैं और पर्यावरण व जलीय जीवों पर नुकसान का खतरा कम रहता है। प्रतिमा निर्माण की तैयारी करीब चार महीने पहले शुरू हो जाती है। इस दौरान परिवार के सदस्य दिन-रात मेहनत कर गणेश चतुर्थी से पहले श्रद्धालुओं की पसंद के मुताबिक प्रतिमाएं तैयार करते हैं।

डिजाइन और सजावट पर भी खास ध्यान
चक्रवर्ती परिवार के मुताबिक प्रतिमाओं के आकार, डिजाइन और सजावट पर विशेष ध्यान दिया जाता है। समय के साथ श्रद्धालुओं की पसंद में भी बदलाव आया है। अब लोग ऐसी प्रतिमाओं की मांग कर रहे हैं, जो आकर्षक होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हों।
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परिवार का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों और युवाओं तक हर वर्ग के लोग प्राकृतिक संसाधनों से बनी प्रतिमाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में कटनी में तैयार हो रही इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

 

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