अंजू सिंह बघेल ने कटनी कलेक्टर रहते हुए आदिवासी रामदत्त गौड़ की जमीन अपने बेटे अभियेन्द्र सिंह के नाम स्थानांतरित कर दी थी। इस मामले में रामदत्त गौड़ को राशि का भुगतान भी नहीं किया गया था, जिसकी शिकायत EOW ने सितंबर 2017 में दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मध्यप्रदेश में लगातार पूर्व आईएएस अधिकारियों के गफलत के मामले समाने आ रहे हैं। इसी कड़ी में ताजा नाम जुड़ा है कटनी के तत्कालीन कलेक्टर अंजू सिंह बघेल का जिन्होंने अपने कार्यकाल में आदिवासियों की जमीनों के साथ कई हेराफेरी की थी। जिनके दो प्रकरणों पर अब राज्य सरकार और केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (DOPT) द्वारा ईओडब्ल्यू में दर्ज एफआईआर पर चार्जशीट पेशकर कोर्ट में केस चलाने की अनुमति दे दी है।
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दरअसल अंजू सिंह बघेल ने कटनी कलेक्टर रहते हुए आदिवासी रामदत्त गौड़ की जमीन अपने बेटे अभियेन्द्र सिंह के नाम स्थानांतरित कर दी थी। इस मामले में रामदत्त गौड़ को राशि का भुगतान भी नहीं किया गया था, जिसकी शिकायत ईओडब्ल्यू ने सितंबर 2017 में दर्ज कर जांच शुरू की थी। ईओडब्ल्यू की जांच में पाया कि कटनी जिले की ग्राम जगुआ बरई की 7.6 हेक्टेयर जमीन आदिवासी रामदत्त गौड़ के नाम थी, जिसे सामान्य जाति के व्यक्ति को बेच दिया गया था। पुत्र से पहले जमीन पवन राव के नाम करने के बाद उसे अपने बेटे के नाम पर करा लिया था। यही नहीं तत्कालीन कलेक्टर अंजू सिंह के खिलाफ एक मामला भी समाने आया था, जिसमे एक ठेकेदार को निजी तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें हाइवे किनारे की बेशकीमती जमीन के बदले किसी सस्ती जमीन से अदला-बदली करने की अनुमति दे दी थी। जिसके विरुद्ध आदिवासी किसान ने शिकायत देते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इन दोनों प्रकरणों पर अब शासन ने रिटायर हो चुकी कटनी की तत्कालीन कलेक्टर अंजू सिंह बघेल पर कोर्ट केस चलाने की अनुमति दे दी है।