सिंधिया ने कहा, 'कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए सोचने के लिए भी 28 में से 28 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी और उन्होंने हाल ही में एक और विधायक (राहुल लोधी) खो दिया है, जो भाजपा में शामिल हो गए हैं। यह पूरी तरह से साफ है कि लोगों को कांग्रेस पार्टी से कोई उम्मीद नहीं है। मुझे नहीं लगता कि किसी अन्य राज्य में इतनी बड़ी संख्या में आपने विधायकों को, करीब 30 फीसदी, पार्टी छोड़ते हुए देखा गया होगा। इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी में लोगों का भरोसा नहीं है।'
बता दें कि प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में से वर्तमान में भाजपा के 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 88, चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा का विधायक है। भाजपा को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र नौ सीटों पर जीत दर्ज करने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को इसके लिए सभी 28 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। ऐसे में संख्या के आधार पर यह उपचुनाव कांग्रेस से ज्यादा आसान भाजपा के लिए दिखाई देता है।
कांग्रेस द्वारा चुनाव प्रचार में पार्टी नेताओं द्वारा उन्हें गद्दार कहे जाने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि यह ऐसा शब्द है जिसका मैं राजनीति में सामान्य तौर पर इस्तेमाल नहीं करता हूं। सिंधिया ने कहा कि राजनीति में एक निश्चित स्तर होता है और उसका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर वे इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं तो मध्यप्रदेश में सबसे बड़े गद्दार कमलनाथ और दिग्विजय सिंह है जिन्होंने साढ़े सात करोड़ लोगों के साथ गद्दारी की है।'
वहीं, भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी को लेकर कमलनाथ की 'आइटम' वाली टिप्पणी पर सिंधिया ने कहा कि नेताओं को नैतिकता का पालन करना चाहिए और उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी एक महिला पर थी जो जमीनी स्तर से उठकर आई है, जिसने सरपंच तका चुनाव लड़ा है, तीन बार विधायक बनी है और कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री थी। कमलनाथ कहते हैं कि उन्हें उनका (इमरती देवी का) नाम याद नहीं, यह उनके दंभ को दर्शाता है।