मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों की टीम मैदान में उतार दी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रचार अभियान समिति (कैंपेन कमेटी) की कमान सौंप दी गई है।
पूर्व मंत्री सुरेश पचौरी को घोषणा पत्र समिति का प्रमुख बनाया गया है। वहीं कमलनाथ सभी समितियों के संयोजक होंगे। दिग्विजय सिंह समर्थक प्रेमचंद गुड्डू को मीडिया प्रबंधन का काम सौंपा गया है।
अनुमान लगाए जा रहे थे कि इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रचार की कमान सौंप सकती है।
भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह से दिग्विजय सिंह के दस साल की तुलना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दस साल के साथ करने की रणनीति अपनाई है, कांग्रेस दिग्विजय सिंह को प्रचार में ज्यादा उतारने से बचना चाहती थी।
कांग्रेस में कमलनाथ और सत्यव्रत चतुर्वेदी पहले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव प्रचार की कमान सौंपने की बात कर चुके हैं।
मुरैना रैली में इस बात की पुष्टि हो गई थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को जल्दी ही प्रचार अभियान की कमान सौंपने की घोषणा की जाएगी। सुरेश पचौरी कैंप को भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर कोई आपत्ति नहीं है।
मध्य प्रदेश में करीब एक करोड़ नए वोटर मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। इनमें से ज्यादातर मतदाता पहली बार वोट करने वाले हैं। कांग्रेस इन मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए एक नौजवान चेहरा मैदान में उतारना चाहती है।
अरुण यादव चुनाव प्रबंधन का काम संभालने वाले हैं। विधानसभा के मॉक सेशन आयोजित करने वाले नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करने का काम सौंपा गया है।
कांग्रेस ने नसरुल्लागंज और मुरैना की रैलियों में एकजुटता प्रदर्शित करने का पूरा प्रयास किया है। अब सिंधिया के लिए एक बड़ी चुनौती होगी वह विभिन्न गुटों में बंटी प्रदेश कांग्रेस को एकजुट कर सकें।
साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने अपना सारा जोर शिवराज सिंह पर लगाया है।
कांग्रेस भी उनके मुकाबले ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतारकर छवियों के संघर्ष में पिछड़ना नहीं चाहेगी। सिंधिया की छवि एक साफ-सुथरे और नौजवान नेता की है।