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पकड़ा गया झाबुआ विस्फोट का गुनहगार कासवा

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मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद कस्बे में जिलेटिन की रॉड और विस्फोटक इकट्ठा कर तबाही मचाने का आरोपी राजेन्द्र कासवा आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर लिया है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार मामले की जांच कर रही पुलिस ने बीती रात कासवा के बीवी, बेटे और बेटी से पूछताछ की थी जिसके बाद उनकी निशानदेही पर उसे दबोच लिया गया। वहीं पुलिस ने कासवा को जिलेटिन रॉड बेचने के आरोपी धमेन्द्र राठौर को भी धार जिले के बदनावर से गिरफ्तार कर लिया।

वारदात के बाद से ही राजेन्द्र कासवा परिजनों संग फरार हो गया था जिसकी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही थी। हालांकि इस बात की भी आंशका जताई जा रही थी कि हादसे में उसकी भी मौत हो गई है।
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लेकिन पुलिस उसे फरार मानकर ही चल रही थी। पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था। वहीं उसकी गिरफ्तारी न होने पर पुलिस और प्रदेश सरकार भी उंगली उठ रही थी।

पुलिस ने बीवी और बच्चों से की थी पूछताछ

पुलिस को पहली कामयाबी उस समय मिली जब बीती रात वह राजेन्द्र कासवा की पत्‍नी और बेटी को खोजने में सफल हो गई। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की तो कासवा की लोकेशन महाराष्ट्र में होने की जानकारी मिली।

जिसके बाद पुलिस की एक टीम देर रात ही उसे दबोचने के लिए निकल गई। जहां पुलिस ने महाराष्ट्र के नब कस्बे से उसे धर दबोचा। उसके भाई फूलचंद और नरेन्द्र को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थी।

हालांकि अभी तक पुलिस ने कासवा की गिरफ्तार पर खुलकर कुछ भी नहीं कहा है लेकिन उसकी गिरफ्तारी की बात से इंकार भी नहीं किया जा रहा है।

बता दें कि झाबुआ के पेटलावद कस्बे में एक फर्टिलाइजर की दुकान में हुए भयानक विस्फोट में 100 के करीब लोगों की मौत हो गई थी जबकि काफी संख्या में लोग घायल हुए थे।
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सरकार ने बनाया एक सदस्यीय जांच आयोग

बताया जा रहा था कि विस्फोट दुकान के अंदर रखी विस्फोटक सामग्री और जिलेटिन की छडों में हुआ था जिन्हें खनन के अवैध कारोबार के लिए इकट्ठा किया गया था। पुलिस ने हादसे के बाद कासवा के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया था।

कासवा को आरएसएस कार्यकर्ता और भाजपा की व्यापारिक इकाई का शहर अध्यक्ष भी बताया जा रहा है। इसी को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

कांग्रेस अभी तक कासवा की गिरफ्तारी न होने पर भी मुख्यमंत्री पर निशाना साध रही थी। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने झाबुआ घटना की जांच के लिए हाइकोर्ट के रिटायर्ड जज आर्येन्द्र कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन कर दिया था।
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