याचिका में बताया गया कि प्राथमिक शिक्षकों के 56 हजार से अधिक पद रिक्त हैं, फिर भी ओबीसी वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों को महाधिवक्ता के गलत अभितम के कारण होल्ड कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने अन्य पिछड़ा वर्ग के मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में चयनित नहीं किए जाने पर जवाब तलब किया है। जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने तीन अलग-अलग याचिकाओं पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और आयुक्त लोक शिक्षण को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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यह मामले जबलपुर निवासी अंकिता पटेल, दतिया निवासी श्रीराम झा, मंदसौर की सुधा चौधरी समेत करीब 150 उम्मीदवारों की ओर से दायर किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि प्रदेश में 13 फीसदी ओबीसी व 13 प्रतिशत सामान्य वर्ग के विभिन्न भर्तियों में लाखों अभ्यार्थियों को होल्ड किया गया है। इससे उनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है। प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में भी ओबीसी के एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों को होल्ड कर दिया गया है।
आवेदकों की ओर से बताया गया कि उक्त अभ्यर्थियों से कम अंक पाने वालों को नियुक्ति दे दी गई है। इतना ही नहीं अनारक्षित वर्ग से अधिक अंक प्राप्त करने वाले ओबीसी के सैकड़ों अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में चयनित नहीं करके उनके ही वर्ग में चयन किया गया है। नियमानुसार यह गलत है और इसमें आयुक्त डीपीआई ने गंभीर त्रुटि की है। याचिका में बताया गया कि प्राथमिक शिक्षकों के 56 हजार से अधिक पद रिक्त हैं, फिर भी ओबीसी वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों को महाधिवक्ता के गलत अभितम के कारण होल्ड कर दिया गया है। मामलों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।