विशेष विवाह अधिनियम के तहत आवेदन देने के बाद मचे बवाल के बाद हिंदू लड़की और मुस्लिम युवक ने सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया था। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट के एकलपीठ ने चैंबर में मामले की सुनवाई की। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद प्रेमी युगल को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश पुलिस अधीक्षक को दिए हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों अलग-अलग रहेंगे तथा एक दूसरे से संपर्क नहीं करेंगे।
बता दें कि इंदौर निवासी अंकिता ठाकुर तथा सिहोरा निवासी हसनैन अंसारी ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उन्होंने विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के लिए कलेक्टर जबलपुर कार्यालय में आवेदन किया था। उसके बाद से लड़की पक्ष तथा धार्मिक संगठन के लोग विरोध कर रहे हैं, जिसके कारण दोनों को अपनी जान का खतरा है।
एकलपीठ द्वारा मामले की सुनवाई चैंबर में की गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि दोनों के बीच विगत चार साल से प्रेम संबंध है तथा एक साल से लिव-इन-रिलेशनशिप में है। दोनों अपनी मर्जी से शादी करना चाहते हैं। लड़की के परिजनों ने विरोध करते हुए पूर्व में पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुआ विवाह भी विशेष समुदाय के एक्ट के तहत मान्य नहीं होगा। मुस्लिम समाज में अग्नि व मूर्ति पूजन करने वालों से विवाह मान्य नहीं है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश व्यक्ति को अपने जीवन के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार है। बल व हिंसा से किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं को खतरा है। इसलिए पुलिस अधीक्षक जबलपुर उन्हें सुरक्षा प्रदान करे। पुलिस लड़की को अपनी सुरक्षा में इंदौर स्थित घर ले जाए। लड़की द्वारा आवश्यक सामान लेने के बाद पुलिस उसे जबलपुर स्थित राजकुमार बाई बाल निकेतन में रखे। बाल निकेतन में उसे भोजन, आश्रय तथा सोने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध करवाया जाए। लड़की को पुलिस सुरक्षा में विशेष विवाह अधिनियम के तहत बयान दर्ज करवाने 12 नवंबर को कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए। इस दौरान वह हसनैन से विवाह करने के संबंध में विचार कर सकती है। इस दौरान हसनैन या उसके परिवार वाले उससे संपर्क नहीं करेंगे।
एकलपीठ ने अपने आदेश में हसनैन को भी सुरक्षा प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उसे सुरक्षित एकांत स्थान पर रखा जाए। स्थिति सामान्य होने के बाद उसे घर पर छोड़ दिया जाए। एकलपीठ ने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ताओं को ले जाते समय कोई उनसे बात करना चाहे या रोकने का प्रयास करने से उनके खिलाफ विधि अनुसार कार्यवाही करते हुए प्रकरण दर्ज करें।
अधिवक्ता ने लिया वकालतनामा वापस, मां को आए चक्कर
याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपना वकालतनामा वापस लेने का आग्रह किया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को दूसरा अधिवक्ता नियुक्त करने की स्वतंत्रता दी है। याचिका की सुनवाई के दौरान लड़की की मां को चक्कर आ गए थे। एकलपीठ ने प्रकरण की गंभीरता से देखते हुए चैंबर में मामले की सुनवाई की।