मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फाइल फोटो।
चित्तीदार हिरण का शिकार कर उसका मांस पकाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। आवेदन की ओर से तर्क दिया गया कि एफएसएल यह बताने में असमर्थ है कि उक्त पका हुआ मांस किस जानवर का है। हाईकोर्ट के जस्टिस आर.सी. वाणी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान किया है।
आवेदक प्रतिम भूमिका की ओर से दायर आवेदन में कहा गया था कि उसके खिलाफ पुलिस स्टेशन फॉरेस्ट सर्कल विजय राघवगढ़, जिला कटनी में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं 2, 9, 39, 51 और 52 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने चित्तीदार हिरण (चीतल) का शिकार किया और उसका मांस पका रहा था। पुलिस ने पका हुआ मांस जब्त कर जांच के लिए एफएसएल को भेजा था। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, वह यह बताने में असमर्थ है कि पका हुआ मांस किस जानवर का है।
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जमानत आवेदन में कहा गया था कि आवेदक 1 मार्च 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है। पुलिस ने प्रकरण में चार्जशीट भी न्यायालय में पेश कर दी है। इसके अलावा घटना का कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं है। प्रकरण में आवेदक के खिलाफ उसे दोषी ठहराने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
वह न्यायालय द्वारा लगाई जाने वाली सभी जमानत शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है। सरकार की ओर से जमानत आवेदन का विरोध करते हुए उसे खारिज करने की प्रार्थना की गई। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आवेदक को जमानत का लाभ प्रदान कर दिया।