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जबलपुर: एमबीबीएस में दाखिले की प्रक्रिया पूरी, फिर भी निरस्त हुई सीट; हाईकोर्ट ने कॉलेज से मांगा जवाब

Thu, 29 Oct 2026 07:47 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

कॉलेज प्रबंधन द्वारा ऑनलाइन एडमिशन स्लिप जनरेट नहीं करने से छात्र दिव्यांशु सेपटा की एमबीबीएस सीट निरस्त हो गई। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए छात्र के लिए एक सीट रिक्त रखने के निर्देश दिए और अनावेदकों से जवाब मांगा।

 

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जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही से एमबीबीएस कोर्स में आवंटित सीट निरस्त होने के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कॉलेज प्रबंधन ने काउंसलिंग और दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद ऑनलाइन एडमिशन स्लिप जनरेट नहीं की थी। इसके कारण छात्र की आवंटित सीट निरस्त कर दी गई थी। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए पीड़ित छात्र ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के लिए एक सीट रिक्त रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बड़वानी निवासी दिव्यांशु सेपटा की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि उसने एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए नीट परीक्षा दी थी। अपनी रैंक के आधार पर उसे काउंसलिंग के माध्यम से आरकेडीएफ कॉलेज में सीट आवंटित की गई थी। मॉप अप राउंड में उसने सीट अपग्रेड करने के लिए आवेदन किया था।

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मॉप अप काउंसलिंग के दौरान उसने फिजिकल रिपोर्टिंग, फीस जमा करने और नोडल अधिकारी से सत्यापन सहित दाखिले की पूरी प्रक्रिया संपन्न की थी। इसके बाद उसे सीट आवंटित की गई थी। हालांकि, बाद में उसे ईमेल के माध्यम से सूचित किया गया कि उसकी आवंटित सीट निरस्त कर दी गई है। सीट निरस्त करने का कारण बताया गया कि कॉलेज प्रबंधन ने पोर्टल पर एडमिशन रसीद जनरेट नहीं की थी।

कॉलेज की गलती का खामियाजा छात्र को भुगतना पड़ा
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संधी ने युगलपीठ को बताया कि संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी इस संबंध में कॉलेज को पत्र लिखा था। विभाग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया था कि छात्र की एडमिशन रसीद पोर्टल पर जनरेट करने की जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन की है।

अधिवक्ता ने दलील दी कि कॉलेज प्रबंधन की गलती का खामियाजा छात्र को भुगतना पड़ रहा है, जबकि उसने दाखिले की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न की थी। मामले की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के लिए एक सीट रिक्त रखने के निर्देश जारी करते हुए अनावेदकों से जवाब तलब किया है।

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