जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पी.के. अग्रवाल की एकलपीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के सहयोगी शरद जायसवाल की दूसरी जमानत अर्जी निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला संगठित आर्थिक अपराध से जुड़ा है, जिसमें कई स्तर पर अवैध लेन-देन और नेटवर्क शामिल हैं।
आरोपित के विरुद्ध प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। रिहा होने पर दोबारा अपराध करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में इस स्तर पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। आवेदक की ओर से दलील दी गई थी कि उसे इस कथित अपराध की जानकारी नहीं थी।
शरद का मामला परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा से जुड़ा है। आरोप है कि सौरभ ने अवैध रूप से संपत्ति अपने परिजनों और करीबी सहयोगियों के नाम पर खड़ी की, जिसमें शरद जायसवाल भी शामिल हैं। शरद जायसवाल को 10 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 29 जुलाई 2025 को भी हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
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लोकायुक्त की 19 दिसंबर 2024 को की गई छापेमारी में सौरभ शर्मा के घर से 1.14 करोड़ रुपये नकद, सोने के आभूषण सहित कुल 3.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। वहीं सह-आरोपी चेतन सिंह गौर के यहां से भी करीब 1.68 करोड़ रुपये नकद और 2.11 करोड़ रुपये की चांदी बरामद हुई थी।
लोकायुक्त में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मामले की जांच शुरू की। ईडी के अनुसार, यह पूरा मामला अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसे वैध दिखाने से जुड़ा है, जो मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है। जांच में यह भी सामने आया कि अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के जरिए कथित काले धन को वैध बनाने की साजिश रची गई थी।