जबलपुर के अधारताल थानान्तर्गत खजरी खिरिया बायपास में हुए स्क्रैप यार्ड ब्लास्ट मामले में एक आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिल गया है। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने पुलिस जांच पर कोई सवालिया निशान भी उठाए। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अभियोजन पक्ष इस मामले में दिलचस्पी नहीं रखता है। याचिकाकर्ता को अनिश्चितकाल के लिए सलाखों के पीछे रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
स्क्रैप यार्ड ब्लास्ट में दो युवकों की मौत के मामले में पुलिस ने संचालक मो. शमीम, उसके बेटे फहीम तथा मैनेजर सुल्तान अली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता सुल्तान अली ने जमानत के लिए तीसरी बार आवेदन पेश किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 304, विस्फोट एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद प्रकरण में धारा 212 को बढ़ाया गया था। प्रकरण में पुलिस की तरफ से चालान पेश कर दिया गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उसने ऑर्डनेंस फैक्टरी खमरिया से स्क्रैप खरीदा था। अनुबंध के तहत उसने स्क्रैप सह आरोपियों के यार्ड में रखवाया था। दुर्भाग्य से स्क्रैप में विस्फोट हो गया, जिससे दो व्यक्तियों की मौत हो गई।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पूर्व में दायर दो जमानत याचिकाओं के दौरान राज्य के वकील से बार-बार पूछा गया कि आयुध निर्माणी में बम के साथ स्क्रैप डिलीवरी का वास्तविक कारण पता लगाने के लिए पुलिस ने कुछ सबूत व सामग्री एकत्र की है। राज्य की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने स्क्रैप खरीदने के लिए ओएफके से संपर्क किया था। आयुध कारखाने के अधिकारियों की भूमिका की जांच तथा बम या अर्ध जीवित बम के साथ फायर किए गए बम के टुकड़े की डिलीवरी के संबंध में राज्य के वकील का कहना था कि इस संबंध में पत्र लिखा गया है। एकलपीठ ने उक्त तल्ख टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता को जमानत का लाभ प्रदान कर दिया।