सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में गत 19 फरवरी को अंतिम आदेश पारित कर मामले मप्र हाईकोर्ट भेज दिए थे और कहा था कि तीन माह के भीतर इनका अंतिम निराकरण किया जाए। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन पेश कर उक्त आदेश में संशोधन की मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने दो प्रकरणों को ट्रांसफर नहीं किए हैं। इनकी सुनवाई शीर्ष अदालत में ही होगी। वहीं शेष 52 प्रकरण मप्र हाईकोर्ट भेज दिए गए हैं।
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विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि मप्र हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण के विचाराधीन सभी प्रकरणों को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराए गए थे। ये मामले दो अलग-अलग बैंचो में अलग-अलग युगलपीठ के समक्ष लंबित थे। लगभग एक दर्जन मामले जस्टिस नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक आराधे के समक्ष नियत थे। इनमें ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर द्वारा नियमित सुनवाई हेतु आवेदन दाखिल किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को अंतिम आदेश पारित कर इन प्रकरणों को हाईकोर्ट भेज दिए थे। इसके बाद दीपक पटेल की ओर से एक रिव्यू याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित आदेश के तहत 52 प्रकरण मप्र हाईकोर्ट वापस भेज दिए। हाई कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए पक्षकारों को संबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए 15 अप्रैल तक की मोहलत दी थी। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं पर अगली सुनवाई 2 मार्च को निर्धारित की थी। दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस की गई थीं उन्हें रिकॉल कर लिया है।