मेडिकल छात्र द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन के उस नियम को चुनौती दी गई थी, जिसमें विदेश में अध्ययनरत छात्र को उसे देश में एक साल की इंटर्नशिप करना आवश्यक है। याचिका में कहा गया था कि वह यूक्रेन में मेडिकल कोर्स कर रहा था। यूक्रेन पर रूस में हमला कर दिया है, ऐसी स्थिति में उसे देश में इंटर्नशिप करने कैसे जा सकता है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस एके पालीवाल ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बता दें कि भोपाल निवासी अशोक कुमार पचौरी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि पूर्व में विदेश में एमबीबीएस का कोर्स करने वाले छात्रों को एक साल तक देश में इंटर्नशिप करना आवश्यक थी। इसके बाद स्क्रीनिंग टेस्ट कर उन्हें डॉक्टरी करने की मान्यता प्रदान की जाती थी। नेशनल मेडिकल कमीशन ने 18 नवंबर 2021 को नया आदेश जारी किया। जिसके तहत विदेश से एमबीबीएस कोर्स करने वाले छात्रों को उक्त देश में एक साल इंटर्नशिप करना जरूरी है।
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया था कि उक्त आदेश 18 नवंबर 2021 से प्रभावी हुआ था। याचिकाकर्ता ने 3 नवंबर 2021 को एडमिशन लेकर फीस जमा कर दी थी। इसलिए यह नियम उस पर प्रभावी नहीं होता है। कोर्स 10 दिसंबर से प्रारंभ होने के कारण एनएमआई ने उसे नए नियम के दायरे में ले लिया। एक साल की पढ़ाई करने के बाद साल 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। रूस व यूक्रेन के बीच पिछले एक साल से जंग जारी है। अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी करते हुए युगलपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता ऑनलाइन के माध्यम से क्लास अटैंड कर रहा है। जान को जोखिम में डालकर याचिकाकर्ता छात्र इंटर्नशिप करने यूक्रेन कैसे जा सकता है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग, प्रमुख सचिव मेडिकल एजुकेशन तथा नेशनल मेडिकल कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की गई है।