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MP News: दृष्टिबाधितों को न्यायिक सेवा में मिलेगा आरक्षण, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की जानकारी

Wed, 22 Oct 2025 11:20 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को न्यायिक सेवा में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आरक्षण देने के आदेश के पालन हेतु चार माह का समय दिया। कोर्ट ने कहा कि दृष्टिबाधित उम्मीदवार न्यायिक सेवा के लिए अनुपयुक्त नहीं हैं और उन्हें चयन प्रक्रिया में भाग लेने का पूरा अधिकार है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में लंबित संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की तरफ से बताया गया कि न्यायिक सेवा में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आरक्षण दिया जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने समय प्रदान करने का आग्रह किया। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की युगलपीठ ने चार माह का समय प्रदान किया है।

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को न्यायिक सेवा में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आरक्षण देने के आदेश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी मध्य प्रदेश सहित कई अन्य प्रदेश के हाईकोर्ट ने न्यायिक सेवा में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आरक्षण प्रदान नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट इसे संज्ञान में लेते हुए मामले की सुनवाई याचिका के रूप में कर रहा था। याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की तरफ राज्य सरकार के परामर्श से नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।

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युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को न्यायिक सेवा के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जा सकता है। वे न्यायिक सेवा में पदों के लिए चयन प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र हैं। मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 1994 के नियम 6ए में किया गया संशोधन संविधान के विरुद्ध है। इसमें उन दृष्टिबाधित व्यक्तियों को शामिल नहीं किया गया है जो उस पद के लिए आवेदन करने हेतु शैक्षणिक रूप से योग्य हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अब समय आ गया है कि हम दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में मान्यता प्राप्त दिव्यांग-आधारित भेदभाव के विरुद्ध अधिकार को मौलिक अधिकार के समान दर्जा दें। जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी उम्मीदवार को केवल उसकी दिव्यांगता के आधार पर विचार से वंचित न किया जाए। दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को न्यायिक सेवा के लिए अनुपयुक्त नहीं कहा जा सकता और वे न्यायिक सेवा में पदों के लिए चयन प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र हैं। युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को चार माह का समय प्रदान करते हुए स्टेटस रिपोर्ट पेश करने आदेश जारी किए हैं। 

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