नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार में बलात्कार के मामले में निरुद्व बंदी अचानक से लॉकअप से गायब मिला। बंदी के एकाएक फरार होने की खबर ने जेल प्रशासन के हाथ पैर फूला दिये और पूरे जेल परिसर में अलार्म की गूंज और सघन तलाशी अभियान चलाया गया। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने जेल की हर बैरक के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली, साथ ही परिसर में भी गश्ती बढ़ाते हुए खोजबीन की गई, लेकिन देर रात तक बंदी 32 वर्षीय रमेश कोल पिता दद्दी कोल का कुछ पता नहीं चला।
जिसके बाद उसके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई गई, लेकिन शुक्रवार सुबह तालाब बगीचा के पास बंदी को जेल कर्मियों ने धर दबोचा। जेल प्रशासन ने मामले में लापरवाही बरतने वाले दो प्रहरियों को निलंबित कर दिया है। जेल अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि मूलतः कटनी कैमोर के लाल नगर निवासी 32 वर्षीय रमेश पिता दद्दी कोल को कटनी न्यायालय ने पॉक्सो, दुष्कर्म व अपहरण के मामले में 25 नवंबर 2024 को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था।
वर्ष 2015 में कटनी से जबलपुर जेल हुआ था स्थानांतरित
बंदी रमेश कोल को वर्ष 2015 कटनी जेल से जबलपुर केंद्रीय जेल स्थानांतरित किया गया था। जिसे यहां पर पश्चिमी खण्ड के बैरक में रखा गया थाा। पौने आठ बजे गिनती के दौरान एक बंदी कम पाया गया। जिसके बाद पूरे जेल में हड़कंप मच गया और जेल का अलार्म लगता बजता रहा, जिसके बाद मौके पर सभी अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे। जिसके पश्चिमी खंड के बैरक-09 ए व 09 बी की सघन चौकिंग की गई, लेकिन बंदी का कुछ पता नहीं चला। जिसके बाद उक्त खंड के समस्त बैरकों की रात्रि एक बजे तक बारीकी से तलाशी ली गई, लेकिन बंदी का कोई सुराग नहीं लगा। जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई।
तालाब के बगीचा में छिपा बैठा था बंदी
जेल से भागने के प्रयास में आरोपी बंदी बैरक से गायब हो गये जेल परिसर सात से आठ एकड़ में फैले तालाब वाले बगीचा में छिप गया था। रात्रि गश्ती के दौरान दो सहायत जेल अधीक्षक व आठ प्रहरियों आजाद हिन्द खंण्ड तालाब की झाडिय़ों से लेकर आसपास सघन चौकिंग अभियान चलाया गया। रात गुजरने के बाद सुबह आरोपी बंदी तालाब बगीचा के अंदर ही छिपा हुआ मिला। जिसके बाद जेल प्रशासन ने ड्यूटी पर तैनात दो कर्मियों सुरेन्द्र तुर्रकर व मुख्य प्रहरी विजय गुप्ता को प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया है।