जिला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर शत्रुघ्न दाहिया ने बताया कि वैक्सीनेशन एप पर दो दिन पहले एक मैसेज मिला। इसमें जबलपुर के मैक्स हेल्थ केयर इंस्टीट्यूट को 10 हजार डोज आवंटित करने की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल का नाम पहली देखा-सुना तो हैरत हुई। दो दिन सीएमएचओ के माध्यम से इस अस्पताल के बारे जबलपुर में रिकॉर्ड आदि को तलाशा गया। परंतु रिकॉर्ड में भी इस नाम का अस्पताल नहीं मिला। इसकी सूचना भोपाल के अधिकारियों को भी दी गई है।
डॉ. दाहिया ने बताया कि भोपाल के अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि इस बात की जांच की जाए कि कहीं किसी निजी अस्पताल या फिर किसी शरारती तत्व ने ऐसा कुछ किसी साजिश के तहत तो नहीं किया है। वैक्सीन के दुरुपयोग या डंप किए जाने की आशंका पर अफसरों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही सीरम संस्थान से भी इस अस्पताल के बारे में ब्यौरा मांगा गया है।
जानकारी के मुताबिक, अनुबंध के तहत निजी अस्पतालों को 600 रुपए प्रति डोज की दर से भुगतान करना है। ऐसे में 10 हजार डोज के एवज में 60 लाख रुपए का भुगतान किया गया होगा। अब सवाल ये है कि आखिर इतनी बड़ी राशि लगाने वाले अस्पताल ने फर्जी पता क्यों लिखवाया होगा? जिला टीकाकरण अधिकारी शत्रुघ्न दाहिया के मुताबिक प्रकरण की जानकारी जबलपुर से लेकर भोपाल और दिल्ली के अधिकारियों को दी गई है। अभी तक इस अस्पताल के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है।
कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाले सीरम संस्थान और केंद्र सरकार के बीच वैक्सीन खरीद के लिए जो अनुबंध हुआ है, उसमें राज्य सरकार को प्रति डोज 400 रुपये, निजी अस्पताल को 600 रुपये और केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति डोज के हिसाब से वैक्सीन दी जानी है। दो दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने नई घोषणा की है, इसके मुताबिक अब केंद्र सरकार 75 फीसदी वैक्सीन खुद खरीदेगी। 25 फीसदी वैक्सीन निजी अस्पतालों को सीधे खरीदने की छूट दी गई है। पीएम ने निजी अस्पतालों को कीमत के अलावा अब 150 रुपये अधिकतम सर्विस चार्ज लेने की अनुमति दी है।