मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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डीएनए-एफएसएल सहित अन्य रिपोर्ट के आने पर लेटलतीफी को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए मामले की सुनवाई याचिका के रूप में किए जाने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष सरकार ने लंबित आंकड़ों के संबंध में जानकारी पेश की। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
गौरतलब है कि डीएनए-एफएसएल रिपोर्ट सहित अन्य रिपोर्ट के आने में लेटलतीफी को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किए थे। याचिका में कहा गया था कि देर से रिपोर्ट आने के कारण न्यायालय में लंबित प्रकरण की सुनवाई में देरी होती है। इसके कारण लंबित प्रकरण की संख्या भी बढ़ती है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से फॉरेंसिक रिपोर्ट का स्टेटस रिकॉर्ड पेश किया था। युगलपीठ ने डीएनए, एफएसएल तथा अन्य लंबित जांच के संबंध में रिपोर्ट पेश करने के आदेश रजिस्ट्रार जनरल को जारी किए थे।
पिछली सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से पेश रिपोर्ट पर सरकार के आग्रह पर युगलपीठ ने जवाब पेश करने समय प्रदान किया था। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी युगलपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। सरकार की तरफ से अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने पैरवी की।