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MP News: बार को जवाब पेश करने मिला दो सप्ताह का समय, अधिवक्ताओं की प्रदेश व्यापी हड़ताल का मामला

Thu, 29 Feb 2024 09:27 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर

सार

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में पारित आदेश को हवाला देते हुए कहा है कि अधिवक्ता काम पर नहीं लौटते हैं तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा। आदेश का पालन नहीं करने वालों अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और निष्कासित किया जाएगा।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेशव्यापी अधिवक्ताओं की हड़ताल को संज्ञान में लेते हुए मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश दिए थे। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर बार एसोसिएशन की तरफ से जवाब पेश किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने प्रदेश के सभी जिला व तहसील बार को जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।
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गौरतलब है कि मार्च 2023 में अधिवक्ता अनिश्चितकालीन प्रदेशव्यापी हड़ताल पर चले गए थे। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करते हुए अधिवक्ताओं को तत्काल काम पर लौटने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में पारित आदेश को हवाला देते हुए कहा है कि अधिवक्ता काम पर नहीं लौटते हैं तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा। आदेश का पालन नहीं करने वालों अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और निष्कासित किया जाएगा। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए कि आदेश की प्रति के साथ स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर, इंदौर व ग्वालियर के अध्यक्ष, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष के अलावा प्रदेश भर के जिला तथा तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को नोटिस जारी करें।

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि 25 प्रकरणों के निराकरण का आदेश तीन माह के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसकी सूचना ई-मेल के माध्यम से एसबीए को भेजी गई थी। इसके बावजूद भी एसबीए के चेयरमैन ने राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी। इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने भी 23 मार्च को स्टेट बार के चेयरमैन को पत्र लिखकर तत्काल हड़ताल वापस लेने के निर्देश दिए थे, जिसका पालन भी नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने बीसीआई को निर्देशित किया था कि आदेश के बावजूद भी काम पर नहीं लौटने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत करवाएं।
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पिछली सुनवाई के दौरान बीसीआई ने कार्यकारिणी समिति की बैठक की मिनिट्स रिपोर्ट पेश की थी। ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से जवाब पेश किया गया था। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से जवाब पेश किया गया। युगलपीठ ने प्रदेश के सभी जिला व तहसील बार एसोसिएशन को जवाब पेश करने दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।
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