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MP News: प्रतिबंधित PFI संगठन के आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका; डिफॉल्ट जमानत के लिए दायर याचिका खारिज

Fri, 13 Oct 2023 10:43 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

MP High Court: एमपी हाईकोर्ट एकलपीठ ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के कार्यकर्ताओं की डिफॉल्ट जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है। पीएफआई के इन आरोपियों को एनआईए ने गिरफ्तार किया था। ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर...।
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एमपी हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफतार किए गए चरमपंथी इस्लामिक संगठन द पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 19 कार्यकर्ताओं ने डिफॉल्ट जमानत का लाभ दिए जाने की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस डीके पालीवाल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से सीआरपीसी की धारा 167 के तहत जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट में कोई आवेदन पेश नहीं किया गया। एकल पीठ ने याचिका को खारिज कर निर्देश जारी किए हैं कि सुनवाई के दौरान आरोपियों को व्यक्तिगत या वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करना सुनिश्चित किया जाए।

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याचिका में की गई थी डिफॉल्ट जमानत की मांग
NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए अब्दुल जमील, मोहम्मद जावेद और अब्दुल खालिद सहित अन्य 19 की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उन्हें मामले की सुनवाई के दौरान विशेष जज के समक्ष भौतिक और तकनीकी माध्यम से उपस्थित नहीं किया जाता है। उनकी न्यायिक रिमांड की अवधि में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि उन्हें सीआरपीसी की धारा 167 के तहत डिफॉल्ट जमानत का लाभ प्रदान किया जाए।

सरकार की ओर पेश की गई दलील
सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए उप महाधिवक्ता बीडी सिंह ने एकलपीठ को बताया कि आरोपियों के खिलाफ देशद्रोह सहित अन्य गंभीर आरोप हैं। वह साल 2047 तक भारतीय संविधान को समाप्त कर देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। आरोपियों द्वारा इस्लामिक कट्टरपंथ फैलाया जा रहा है। साथ ही NIA ने आपत्तिजनक साहित्य और हथियार उनके पास से बरामद किए है।
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उप महाअधिवक्ता ने एकल पीठ को बताया कि धारा 167 के तहत 90 दिनों के अंदर चालान पेश नहीं करने पर आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिलने का कानूनी प्रावधान है। सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत तथा तकनीकी माध्यम से सुनवाई के दौरान पेश करने पर आरोपी को इसका लाभ मिलने का कोई प्रावधान नहीं है। आरोपियों को सुविधा अनुसार सुनवाई के दौरान पेश किया गया है। इसके अलावा सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ट्रायल कोर्ट में मौजूद रहते थे। डिफॉल्ट जमानत के लिए उन्होंने ट्रायल कोर्ट में कोई आवेदन पेश नहीं किया।

एकल पीठ ने जारी किया यह आदेश
एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ताओं की तरफ से ट्रायल कोर्ट में कोई आवेदन पेश नहीं किया गया था। एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रदेश की सभी जेल में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है। जेल अधीक्षक जिस तरफ से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं और विशेष न्यायाधीश मामले को निपटा रहे हैं, यह संतोषजनक नहीं है। विशेष न्यायाधीश ने आरोपियों को किन्हीं कारणों से पेश नहीं किया, इसका उल्लेख नहीं किया। सीआरपीसी में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान व्यक्तिगत तथा भौतिक रूप से सुनवाई के दौरान अभियुक्त की पेशी मान्यता प्राप्त है। जेल अधीक्षक सुनवाई के दौरान अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष आवश्यक रूप उपस्थित करें। इस संबंध में एकल पीठ ने जेल महानिरीक्षक को पत्र लिखने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार न्यायिक को आदेश जारी किए हैं कि सीआरपीसी की धारा 167(2)बी के परिपालन के संबंध में हाईकोर्ट से निर्देश प्राप्त कर प्रदेश के अन्य न्यायाधीश व मजिस्ट्रेट को पत्र जारी करें।

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