मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अधीक्षक पद पर पूर्णकालिक नियुक्ति करने की मांग स्वीकार कर ली है। राज्य सरकार ने इस मामले में कोर्ट में कहा कि संयुक्त संचालक और अधीक्षक के पदों पर फुलटाइम नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद याचिका को स्वीकार कर निराकरण कर दिया गया।
चीफ जस्टिस रवि विजयकुमार मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की। 2016 में दाखिल इस याचिका में मांग की गई थी कि प्रदेश के लगभग सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अधीक्षक के पद खाली हैं। वहां पर प्रभारी ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जो अधीक्षक हैं, उनके पास पहले से पढ़ाने और इलाज की जिम्मेदारी थी। इसके बाद भी अब उन्हें अधीक्षक के पद की भी जिम्मेदारी दे दी गई है। याचिका पर सुनवाई के दौरान शासन ने बताया कि 2022 में बने नए नियमों के अनुसार प्रोफेसर को ट्रांसफर कर अधीक्षक के पद पर पदस्थ किया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि ऐसा करने पर अधीक्षक को प्रभारी क्यों लिखते हैं? प्रोफेसर को ही फुलटाइम अधीक्षक क्यों नहीं बना देते? सरकार ने कहा कि आदेश जारी हो गए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।