याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राधेलाल गुप्ता ने पक्ष रखा।
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जिला, जनपद तथा ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों का डाटा राज्य चुनाव आयोग द्वारा वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि प्रत्याशी के संबंध में मतदाताओं को पूरी जानकारी होना चाहिए। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा ने युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता शिवनाद द्विवेदी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि नामांकन पत्र में प्रत्याशी खुद के संबंध में समस्त जानकारी उपलब्ध करवाते हैं। उनके खिलाफ कितने अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, उनके तथा परिजनों के पास कितनी सम्पत्ति तथा कितना कर्ज है, वे कितने पढे़-लिखे हैं आदि की जानकारी दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्याशियों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने के संबंध में कई आदेश पारित किए हैं। जिससे चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की जानकारी लोगों को मिल सके। चुनाव आयोग भी चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करता है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था।
याचिका में कहा गया था कि जिला पंचायत सदस्य, जनपद पंचायत सदस्य, सरपंच तथा पंच पद के उम्मीदवारों द्वारा स्वयं के संबंध में दी गई जानकारी वेबसाइट में अपलोड नहीं की थी। चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के संबंध में आधी-अधूरी जानकारी अपलोड की है। याचिका में प्रदेश सरकार, केन्द्रीय चुनाव आयोग तथा राज्य चुनाव आयोग को अनावेदक बनाया गया था। युगलपीठ ने अनावेदकों की सूची से केन्द्रीय चुनाव आयोग का नाम हटाने के निर्देश जारी करते हुए अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने पैरवी की।