मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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सिविल जज व एडीजे एग्जाम की उत्तर पुस्तिकाएं सूचना के अधिकार के तहत प्रदान करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष व पारदर्शिता के लिए परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं को व्यक्तिगत नहीं मानते हुए सार्वजनिक मानना चाहिए। जस्टिस शील नागू व जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने सोमवार को उभयपक्षों के तर्क पूरे होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि यह मामला एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस एनजीओ की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि सिविल जज मुख्य परीक्षा की कापियां सार्वजनिक किया जाना चाहिए। निष्पक्ष व पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान की जानी चाहिए। सिविल जज परीक्षा में आरक्षित श्रेणी के बहुत से पदों पर सिलेक्शन नहीं किया गया है। जिसके कारण परीक्षा परिणाम के आधार पर चयन प्रक्रिया के निष्पक्ष होने पर आशंका बनी हुई है। याचिका में इंटरव्यू में 50 में से 20 अंक अनिवार्य होने की बाध्यता को भी मनमाना बताया गया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर तथा विनायक शाह ने पैरवी की।