मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 27 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया गया है। सीनियर एडवोकेट बनने के लिए कुल 48 वकीलों ने आवेदन किए थे। आवेदन उपरांत पांच दिसंबर को साक्षात्कार हुआ, जिसके बाद 27 लोगों को सीनियर एडवोकेट नामांकित किया गया था।
उसके बाद मंगलवार को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्ममिंदर सिंह ने उक्त नामों की अधिसूचना जारी की, जिनमें अधिवक्ता आदित्य संघी, अमित सेठ, अंजली बैनर्जी, अर्पण पवार, अशोक लालवानी, हरप्रीत सिंह रूपराह, जितेन्द्र कुमार शर्मा, मनोज मुंशी, मोहम्मद अली, नरिंदर पाल सिंह रूपराह, प्रहलाद चौधरी, प्रकाश उपाध्याय, पुष्पेन्द्र यादव, राधेलाल गुप्ता, रजनीश कुमार, रामेश्वर पी सिंह ठाकुर, शशांक वर्मा, शेखर शर्मा, सिद्धार्थ गुलाटी, सुधा श्रीवास्तव, सुनील गुप्ता, उदयन तिवारी, वीरेन्द्र शर्मा, विशाल बाहेती, विवेक खेडकर, विवेक खेडक़र व विवेक सिंह को सीनियर एडवोकेट मनोनीत किया गया है।
एसबीसी के चार सदस्य सीनियर एडवोकेट
सीनियर एडवोकेट मनोनीत किए गए 27 वकीलों में चार मप्र राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य हैं। इसमें चेयरमैन राधेलाल गुप्ता, जितेन्द्र शर्मा, विवेक सिंह और सुनील गुप्ता को सीनियर एडवोकेट मनोनीत किया गया है। एसबीसी के वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी ने एसबीसी के चार सदस्यों को सीनियर एडवोकेट मनोनीत किए जाने पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सभी न्यायाधीशों को भी धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही उन्होंने समस्त 27 सीनियर अधिवक्ताओं को बधाई दी।
वीरेंद्र शर्मा बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच के सीनियर एडवोकेट
उज्जैन के जाने माने वकील वीरेंद्र शर्मा एडवोकेट को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच ने सीनियर एडवोकेट घोषित कर दिया है। मध्यप्रदेश में करीब 1,25,000 रजिस्टर्ड वकील हैं। उज्जैन संभाग में लगभग 3000 से अधिक रजिस्टर्ड वकील हैं। ऐसे में आजादी के बाद से उज्जैन संभाग के सबसे कम आयु में सीनियर एडवोकेट बनने में उज्जैन के वीरेंद्र शर्मा प्रथम रहे, जिनकी आयु 48 वर्ष है। ये क्रिमिनल मामलों के जानकार हैं।
बता दें कि साल 2001 से विधि व्यवसाय में कार्य कर रहे हैं। 50 से ज्यादा न्याय पुस्तकों में इनके न्याय दृष्टांत छप चुके हैं। इस दौरान इन्होंने पुलिस ट्रेनिंग, कई लॉ कॉलेजों में विधि पर व्याख्यान दिए। कई सांसद, विधायक, राजनेताओं के प्रकरण लड़े। श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति के अभिभाषक हैं और बाबा महाकाल के मंदिर के प्रकरणों के लिए नि:शुल्क सेवा के लिए सहमति दी है। नालसा में भी रजिस्टर्ड होकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की विधिक सहायता करते हैं। संभाग के कई चर्चित मामलों में पैरवी की है।