फातिमा ने कहा कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अधिक महत्व नहीं दिया जाता, उसने बिना तनाव लिए मेहनत से पढ़ाई की और यह सफलता हासिल की। उनका मानना है कि कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता, उसके लिए प्रयास करना जरूरी है।
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं कक्षा की मेरिट लिस्ट में जबलपुर की शैजाह फातिमा ने 500 में से 498 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त कर स्कूल और परिवार का नाम रोशन किया है। उसकी इस उपलब्धि से परिजनों और शिक्षकों में खुशी की लहर है। फातिमा ने अपनी इस सफलता का मूलमंत्र 'मानसिक तनाव न लेना' बताया।
शैजाह फातिमा ने बताया कि उसके पिता एक अस्पताल में मैनेजर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। फातिमा ने कहा कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अधिक महत्व नहीं दिया जाता, उसने बिना तनाव लिए मेहनत से पढ़ाई की और यह सफलता हासिल की। उनका मानना है कि कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता, उसके लिए प्रयास करना जरूरी है। शैजाह ने कहा कि वह आगे बायोलॉजी विषय का चयन कर नीट की तैयारी करेगी। उसका सपना डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना है। अपनी सफलता को लेकर शैजाह ने कहा कि पढ़ाई में परिजनों के साथ शिक्षकों का विशेष योगदान रहा। परीक्षा के दौरान वह घर का काम नहीं करती थी। साथ ही पढ़ाई के दौरान भी घर के काम कम ही करती थी।
पिता बोले- बच्चों पर विश्वास करना चाहिए
दसवीं में 500 में से 498 अंक प्राप्त करने वाली शैजाह के पिता मशकूर अहमद का कहना है कि बेटी की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। बेटी ने अपनी मेहनत से यह सफलता प्राप्त की है। वह केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखती थी। प्राइवेट जॉब करने के बावजूद उन्होंने बेटी को हर संभव सुविधा देने का प्रयास किया। उनका मानना है कि सभी अभिभावकों को अपने बच्चों पर विश्वास करना चाहिए और उनसे प्यार से बात कर समझाना चाहिए। बच्चों को शिक्षा का महत्व समझना चाहिए और उनमें समाज व देश के लिए कुछ कर दिखाने का जज्बा पैदा करना चाहिए।