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Jabalpur News: नाबालिग बच्चों को किया जाए परिजनों के सुपुर्द, हाईकोर्ट ने कहा- पढ़ाई नहीं होनी चाहिए प्रभावित

Fri, 07 Feb 2025 09:32 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

हाईकोर्ट ने दमोह के एक मकान से बरामद 12 नाबालिग बच्चों को परिजनों को सौंपने का आदेश दिया। बच्चों ने धर्मांतरण के आरोपों को खारिज किया। कोर्ट ने उनकी शिक्षा प्रभावित न होने की बात कही। बाल कल्याण समिति बच्चों से नियमित संपर्क में रहेगी और साप्ताहिक रिपोर्ट देगी। 
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विस्तार
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने दमोह की क्रिश्चियन कॉलोनी स्थित एक मकान से बरामद 12 नाबालिग बच्चों को उनके परिजनों को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। वे इस शैक्षणिक सत्र में वर्तमान में नवज्योति विद्यालय में ही अध्ययन करेंगे, और बाल कल्याण समिति लगातार बच्चों के संपर्क में रहेगी।

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नाबालिगों ने किया धर्मांतरण के आरोप से इनकार
याचिका की सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित नाबालिग बच्चों ने कथित धर्मांतरण के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे अपनी मर्जी से पढ़ाई और अन्य सुविधाओं के लिए उस घर में रह रहे थे, और उन पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं था।

अभिभावकों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
छतरपुर निवासी कालू भील सहित नौ अभिभावकों ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर मांग की थी कि उनके बच्चों को बाल कल्याण समिति से मुक्त कराया जाए। याचिका में उल्लेख किया गया कि 29 जनवरी को मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग की शिकायत के आधार पर पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग ने दमोह की क्रिश्चियन कॉलोनी स्थित प्रवीण कुमार शुक्ला के घर पर छापा मारा था। वहां से 12 नाबालिग बच्चे बरामद किए गए थे। आरोप था कि मकान मालिक ने आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए रखा हुआ था। इसके बाद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति ने अपनी अभिरक्षा में लेते हुए सागर भेज दिया था।
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कोर्ट का आदेश
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने कोर्ट को बताया कि बच्चों के परिजनों से संपर्क किया गया था, लेकिन वे मिलने नहीं आए। फिलहाल दमोह जिले का कार्य भी सागर बाल कल्याण समिति देख रही है। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंपने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि बच्चे इस सत्र में नवज्योति विद्यालय में ही पढ़ाई जारी रखेंगे। यदि अभिभावक चाहें, तो वे बच्चों को सरकारी हॉस्टल या किराए के मकान में रख सकते हैं, लेकिन इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति को देना अनिवार्य होगा। समिति नियमित रूप से बच्चों से मुलाकात करेगी और साप्ताहिक रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर और भूपेश शुक्ला ने पैरवी की।

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