हाईकोर्ट में नगर निगम जबलपुर के कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस ए. के. सिंह की एकलपीठ ने पदोन्नति प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की दूसरी एकलपीठ द्वारा लगाई गई रोक को बरकरार रखते हुए दोनों याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के आदेश दिए।
नगर निगम के कर्मचारियों कालूराम सोलंकी और संतोष कुमार गौर ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया कि अदालत ने मुख्य स्वच्छता निरीक्षक के रिक्त पदों पर 45 दिनों के भीतर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) गठित कर वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति देने का आदेश दिया था, जिसका पालन नहीं हुआ।
दूसरी ओर, इंटर विनर पोला राव और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि कालूराम और संतोष कुमार ने स्वयं को वरिष्ठता सूची में शीर्ष स्थान पर दिखाते हुए पदोन्नति के लिए याचिका दायर की थी, जबकि वे जूनियर स्वच्छता निरीक्षक थे। नगर निगम अधिनियम के अनुसार, इस पद से स्वच्छता निरीक्षक बनने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने डीपीसी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट की दूसरी एकलपीठ ने स्वीकार कर लिया था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने डीपीसी प्रक्रिया पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए संयुक्त सुनवाई के आदेश दिए। इंटर विनर पोला राव की ओर से अधिवक्ता कबीर पॉल ने पैरवी की।