भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को अधिक मजबूत करने के लिए एक नया स्वदेशी सुरक्षा कवच सामने आया है। आर्मर्ड व्हीकल निगम लि. की जबलपुर स्थित इकाई व्हीकल फैक्टरी जबलपुर (वीएफजे) ने सेना के लिए अगली पीढ़ी का स्वदेशी लाइट आर्म्ड मल्टीपरपज व्हीकल (एलएएमवी) विकसित किया है।
यह बख्तरबंद वाहन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी युद्ध के मैदानों में तैनात होकर सैन्य अभियानों को नई गति देगा। फैक्टरी ने इस वाहन को आत्मनिर्भर भारत अभियान की सोच के अनुरूप तैयार किया है, जिसके अधिकांश कलपुर्जे देश के भीतर ही निर्मित हो रहे हैं। वीएफजे ने इस वाहन का मॉडल तैयार करते समय आधुनिक युद्ध की जरूरतों के साथ-साथ जवानों की सुरक्षा, तेज रफ्तार, भारी सामान ले जाने की क्षमता और कठिन रास्तों पर सहज आवाजाही का विशेष ध्यान रखा है।
कठिन परिस्थितियों में सफल परीक्षण
फैक्टरी ने वाहन की कार्यक्षमता और मजबूती को परखने के लिए देश के बेहद चुनौतीपूर्ण और दुर्गम क्षेत्रों का चयन किया। सूत्रों के अनुसार फैक्टरी ने इस वाहन का मैदानी परीक्षण लेह-लद्दाख के अत्यधिक ठंडे और दुर्गम इलाकों में किया। विशेषज्ञों ने शून्य से नीचे के तापमान, कम ऑक्सीजन वाली पतली हवा, बर्फ से ढकी सड़कों तथा पथरीली चढ़ाइयों के बीच वाहन की क्षमता को परखा।
इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में भी यह वाहन सेना की सभी आवश्यकताओं पर खरा उतरे। सैनिकों की तीव्र आवाजाही, दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने और शहरी युद्ध में यह 4x4 हाई-मोबिलिटी आर्मर्ड प्लेटफॉर्म विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
अत्याधुनिक तकनीकी क्षमताएं
इंजीनियरों ने इस वाहन में कई आधुनिक तकनीकी विशेषताएं जोड़ी हैं जो इसे पारंपरिक सैन्य वाहनों से अधिक सक्षम बनाती हैं। इस वाहन में 450 बीएचपी की क्षमता वाला शक्तिशाली इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन प्रणाली लगी है, जिससे यह 100 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ सकता है। यह वाहन 1,500 किलोग्राम तक का भार उठाने में सक्षम है। वाहन के भीतर चालक समेत कुल चार जवानों के बैठने का स्थान मौजूद है। सैन्य अभियान के दौरान सैनिकों के तेजी से बाहर निकलने और अंदर आने की सुविधा के लिए इसमें पांच दरवाजे दिए गए हैं। इसके सस्पेंशन सिस्टम में आगे और पीछे डबल विशबोन इंडिपेंडेंट सस्पेंशन शामिल है। वहीं ब्रेकिंग सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए एबीएस के साथ डुअल फेल-सेफ ब्रेक दिए गए हैं।
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बारूदी धमाकों से मजबूत सुरक्षा
सैनिकों की सुरक्षा के लिए इस वाहन में उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया है। वाहन में मॉड्यूलर बैलिस्टिक प्रोटेक्शन के साथ-साथ अंडर-हल ब्लास्ट रेजिस्टेंस तकनीक दी गई है। यह प्रणाली गोलियों के वार के साथ भूमिगत बारूदी सुरंगों और आईईडी धमाकों से जवानों की रक्षा करती है। वाहन को लेवल-1 सुरक्षा स्तर प्राप्त है, जो 7.62 मिलीमीटर तक की गोलियों के प्रभाव को रोक सकता है। इसके अलावा वाहन के भीतर रेडियो सेट, गोला-बारूद, रॉकेट लॉन्चर और इंसास राइफल रखने के लिए पर्याप्त स्थान मौजूद है। इससे सैन्य दल आवश्यक हथियारों के साथ लंबे समय तक अभियानों का संचालन कर सकेंगे।
निर्माण इकाई का ऐतिहासिक सफर
इस वाहन का विकास जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्टरी के लंबे अनुभव का परिणाम है। इस निर्माण इकाई की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। अपने शुरुआती दौर में फैक्टरी ने शक्तिमान ट्रक, जोंगा और एक टन भार क्षमता वाले वाहनों का निर्माण शुरू किया था। समय के साथ अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए इस इकाई ने स्टालियन ट्रक, माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल और बुलेटप्रूफ वाहन बनाए। अब इसी शृंखला में स्वदेशी एलएएमवी का विकास फैक्टरी की तकनीकी प्रगति में एक नया अध्याय जोड़ता है।