जबलपुर की होटल में आयुष्मान कार्डधारियों को भर्ती कर चल रहा था उपचार।
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आयुष्मान उपचार योजना के तहत एक निजी अस्पताल प्रबंधक द्वारा फर्जीवाड़ा किए जाने के मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम आई है। योजना के डॉयरेक्टर डॉ. पदमाकर त्रिपाठी की टीम ने फर्जीवाड़े तथा उसकी जांच के संबंध में संबंधितों से जानकारी एकत्र की। पूर्व में किए गए अप्रूवल क्लेम केस के संबंध में भी जानकारी जुटाई। दो सदस्यीय कमेटी अपने स्तर पर जांच कर रही है।
गौरतलब है कि जबलपुर के राइट टाउन स्थित सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्टिपल का प्रबंधन आयुष्मान कार्डधारियों का होटल में रखकर इलाज कर रहे थे। जिसकी जानकारी मिलने पर पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने होटल में दबिश दी थी। स्वास्थ्य विभाग के प्रतिवेदन पर पुलिस ने हॉस्पिटल संचालक डॉ. दुहिता पाठक, उनके पति अश्विनी पाठक तथा मैनेजर के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि खांसी-जुकाम के मरीजों के उपचार के नाम पर आयुष्मान योजना के तहत बड़ी राशि का क्लेम किया जाता था। इसके अलावा जो डॉक्टर हॉस्पिटल में कार्य छोड़कर चले गए हैं, मरीजों के उपचार में उनके नाम का उपयोग किया जाता था। इस मामले की जांच के लिए एएसपी गोपाल खांडेल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। आयुष्मान योजना के डायरेक्टर डॉ. पदमाकर त्रिपाठी की अध्यक्षता में दो सदस्यीय टीम इस घोटाले की जांच के लिए गुरुवार को जबलपुर पहुंची थी।
एसआइटी के प्रभारी एएसपी गोपाल खांडेल ने बताया कि मामले की जांच के लिए भोपाल से टीम आई है, परंतु उन्होंने उनसे संपर्क नहीं किया। सीएचएमओ डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि गत दिवस टीम के दोनों सदस्यों ने उनसे मुलाकात कर फर्जीवाड़े के संबंध में जानकारी प्राप्त की थी। फर्जीवाड़े के संबंध में पुलिस को प्रतिवेदन रिपोर्ट देने वाले डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि जांच के लिए आई टीम ने उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा किन-किन बिंदुओं व होटल में मिले मरीजों व उनके उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की।