जिला उपभोक्ता आयोग जबलपुर ने अपने अहम आदेश में कहा है कि विज्ञापन वाले कैरी बैग की राशि लेना अनुचित व्यापार है। आयोग के अध्यक्ष पंकज यादव तथा सदस्य अमित सिंह तिवारी ने याचिकाकर्ता की सराहना करते हुए अपने आदेश में कहा है कि उन्होंने अनुचित व्यापारिक लाभ को बढ़ावा देने से रोकने का प्रयास किया है।
अधारताल निवासी शिरीष कुमार दूबे की तरफ से दायर किये गये परिवाद में कहा गया था कि अंधेरदेव स्थित शोरूम से अप्रैल 2019 को जूते लिये थे। सभी टैक्स सहित जूते का मूल्य 1,699 रुपये थे। कैरी बैग के तीन रुपये जोड़कर शोरूम संचालक ने उससे 1,702 रुपये लिये, जिसका भुगतान उसने एटीएम कार्ड के माध्यम से किया। परिवाद में कहा गया था कि अनावेदकों को कंपनी के विज्ञापन वाला कैरी बैग निशुल्क देना चाहिये था।
परिवाद की सुनवाई के दौरान अनावेदक की तरफ से कहा गया कि प्रत्येक उत्पादक के पास अपने व्यापार चिन्हों को छापने व प्रदर्शन करने का कानूनी हक है। विज्ञापित कैरी बैग का मूल्य छह रुपये है। परंतु ग्राहक को उन्होंने सिर्फ तीन रुपये में प्रदान किया। आयोग ने अपने आदेश पूर्व में पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विज्ञापित कैरी बैग नहीं लेने पर आयोग को शुल्क के साथ बिना किसी विज्ञापन का कैरी बैग उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किये गये थे।
आयोग ने विज्ञाप्ति कैरी-बैग की राशि लेने को अनुचित लाभ व सेवा में कमी मानते हुए कहा कि छोटी राशि होने के कारण ग्राहक आपत्ति नहीं लेते हैं। अनावेदक कितने सालों से अनुचित लाभ प्राप्त कर रहा है। आयोग ने बाटा शोरूम संचालक को 45 दिनों में कैरी-बैग की राशि, मानसिक कष्ट के लिए तीन हजार रुपये तथा परिवाद व्यय के लिए दो हजार रुपये प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं।