मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से पन्ना कलेक्टर को व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत मिली है। महाधिवक्ता ने जस्टिस एसए धर्माधिकारी की एकलपीठ को आश्वासन दिया है कि जरूरी होने पर कलेक्टर न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। एकलपीठ ने व्यक्तिगत उपस्थिति माफी के आवेदन को स्वीकार कर लिया है।
बता दें कि पन्ना निवासी याचिकाकर्ता परमानंद शर्मा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उन्होंने जनपद पंचायत गुन्नौर के उपाध्यक्ष के लिए नामांकन दायर किया था। उपाध्यक्ष पद के लिए 27 जुलाई को हुए चुनाव में निर्वाचित 25 सदस्यों में से 13 सदस्यों ने वोट दिए थे और वे विजयी निर्वाचित हुए थे। उपाध्यक्ष निर्वाचित होने का सार्टिफिकेट भी उन्हें प्रदान कर दिया गया था। चुनाव की प्रक्रिया होने के बाद सभी सदस्य घर लौट आए थे। शाम 4.30 बजे पराजित प्रत्याशी रामशिरोमणी ने जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा के समक्ष धारा 122 के तहत चुनाव याचिका दायर कर दी। जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर ने तत्काल चुनाव याचिका की सुनवाई करते हुए शाम लगभग 7 बजे पराजित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया हुए सार्टिफिकेट जारी कर दिया। जिला कलेक्टर ने विजयी होने के बावजूद भी उन्हें पक्ष रखने का अवसर प्रदान नहीं किया, जो प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे कि जिला कलेक्टर का आचरण चुनाव आयोग के जिला निर्वाचन अधिकारी की तरह नहीं था। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के एजेन्ट के रूप में कार्य किया और पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर तक प्रदान नहीं किया। उन्होंने तत्काल सुनवाई करते हुए एकपक्षीय निर्णय पारित कर दिया। एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को अनावेदक बनाते के निर्देश जारी करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।
याचिका की सुनवाई के दौरान पन्ना कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने जवाब पेश करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति से मुक्त करने आवेदन प्रस्तुत किया। एकलपीठ ने अपने आदेश में महाधिवक्ता के आश्वासन का हवाला देते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति माफी के आवेदन को स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा तथा सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह उपस्थित हुए।