रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर
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रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय रविवार को आयोजित होने वाले अपने 36वें दीक्षांत समारोह में एक नई पहल करने जा रहा है। समारोह में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मेडल, डिग्री और अंकसूचियों में इंडिया के स्थान पर भारत अंकित किया जाएगा। विश्वविद्यालय का दावा है कि ऐसा करने वाला वह देश का पहला विश्वविद्यालय है।
रादुविवि के कुलपति प्रो. राजेश वर्मा ने बताया कि देश का वास्तविक नाम भारत है और किसी भी भाषा में इसे भारत ही कहा जाना चाहिए। उनका मानना है कि केवल भाषा बदलने से देश का नाम नहीं बदलता, इसलिए विश्वविद्यालय ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इंडिया के स्थान पर भारत शब्द का उपयोग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इस निर्णय के तहत दीक्षांत समारोह में प्रदान किए जाने वाले स्वर्ण, रजत और अन्य मेडल पर भी अंग्रेजी में भारत अंकित रहेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा जारी की जाने वाली डिग्रियों और मार्कशीट में भी इंडिया की जगह भारत लिखा जाएगा।
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दीक्षांत समारोह से होगी शुरुआत
कुलपति ने बताया कि इस पहल की शुरुआत रविवार को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह से की जाएगी। समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी और विद्यार्थियों को मेडल व डिग्रियां प्रदान करेंगी। इन सभी दस्तावेजों और स्मृति चिह्नों पर भारत अंकित रहेगा।
आमंत्रण पत्र और होर्डिंग में भी 'भारत'
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि दीक्षांत समारोह के लिए जारी आमंत्रण पत्रों, प्रचार सामग्री और विभिन्न स्थानों पर लगाए गए होर्डिंग्स में भी इंडिया के स्थान पर भारत का उपयोग किया गया है। कुलपति प्रो. राजेश वर्मा के अनुसार उनकी जानकारी में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसने आधिकारिक स्तर पर यह बदलाव लागू किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अन्य विश्वविद्यालय भी इस दिशा में निर्णय ले सकते हैं, क्योंकि देश का नाम भारत है और उसे उसी रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए।