अप्राकृतिक यौन कृत्य तथा प्रताड़ना के अपराध में न्यायालय ने पति को दोषमुक्त करार दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से अपील दायर की गई थी। पत्नी द्वारा भी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली गई है। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद रिकॉर्ड तलब किया है।
बता दें कि महिला की शिकायत पर नर्मदापुरम महिला थाने में आरोपी पति के खिलाफ धारा 377 तथा 498 का अपराध दर्ज कर प्रकरण को न्यायालय में पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान पति की तरफ से बताया गया था कि उसकी पत्नी उसके साथ मारपीट करती है। उसे अंडरवियर में घर से बाहर निकाल दिया था। इस संबंध में पुलिस में की गई शिकायत भी न्यायालय में पेश की गई थी। आरोपी पति द्वारा मोबाइल फोन में अश्लील फिल्म दिखाकर पत्नी से जबरदस्ती आप्राकृतिक यौन कृत्य करने का आरोप निराधार बताते हुए कहा गया था कि वह मोबाइल में इंटरनेट का प्रयोग भी नहीं करता है। न्यायालय में मेडिकल रिपोर्ट तथा पेश साक्ष्यों के आधार पर पति को दोषमुक्त कर दिया था। जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। पत्नी ने भी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने जिला न्यायालय से रिकॉर्ड तलब किया है।