याचिकाकर्ता रामकुमार राजपूत की तरफ से दायर की गई याकिचा में कहा गया था कि हरदा जिले में उनके पिता गजराज सिंह के नाम पर जमीन थी। उनकी मौत के बाद जमीन मां निर्मिला के नाम पर दर्ज हुई थी। मां की मौत के बाद अनावेदक तीनों बहनों ने जमीन पर अपना हक त्याग दिया था। तहसीलदार के उनके त्याग विलेख के आधार पर जमीन का नामांतरण उसके नाम पर कर दिया गया था।
अनावेदक बहनों ने तहसीलदार के आदेश को चुनौती देते हुए एसडीएम के समक्ष अपील दायर की थी। एसडीएम ने अपील की सुनवाई करते हुए तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया था। एसडीएम के आदेश को चुनौती देते हुए संभागायुक्त नर्मदापुरम के समक्ष अपील दायर की गई थी। संभागायुक्त ने अपील को खारिज कर दिया था, जिसके कारण याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि अनावेदक बहनों ने जमीन पर अपना हक स्वेच्छा से छोड़ते दिया था। उनके त्याग विलेख के आधार पर तहसीलदार ने उनके नाम पर जमीन दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। आवश्यकता नहीं होने के कारण त्याग विलेख पत्र को रजिस्टर्ड नहीं करवाया था। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि त्याग विलेख पत्र रजिस्टर्ड नहीं होने के कारण एसडीएम व आयुक्त द्वारा पारित आदेश उचित है। एकलपीठ ने प्रस्तुत त्याग विलेख पत्र को अस्वीकार करते हुए कहा है कि सभी कानूनी हिस्सेदार जमीन के हकदार हैं।