फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jabalpur: माता-पिता संग नहीं रहना, जाना है पति के साथ, हाईकोर्ट ने खारिज कर दी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

Fri, 14 Jun 2024 03:59 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर

सार

भाई की तरफ से उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। इसमें उसने आरोप लगाते हुए कहा था कि अनावेदक युवक ने उसकी बहन को बंधक बना रखा है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने अनावेदक को अपनी इच्छा अनुसार जीवन जीने की अनुमित प्रदान कर दी। वह माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती थी, उसे पति संग रहना था।
विज्ञापन


बता दें कि सतना निवासी भाई की तरफ से उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। इसमें उसने आरोप लगाते हुए कहा था कि अनावेदक युवक ने उसकी बहन को बंधक बना रखा है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट को पुलिस को निर्देशित किया था कि वह कॉपर्स को न्यायालय के समक्ष पेश करे। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस द्वारा कॉपर्स को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। कॉपर्स की पहचान छुपाने के लिए याचिका की सुनवाई के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग बंद करवा दी थी। कॉपर्स ने युगलपीठ को बताया कि वह व्यस्क है और अपने पति के साथ रहना चाहती है। वह अपने माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती है। 

हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलूवालिया तथा जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने लड़की के नाबालिग होने के संबंध में याचिका दायर नहीं की है। कॉपर्स की इच्छा अनुसार उसे अपने जीवन जीने की अनुमति प्रदान की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें