मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई गई है। इसमें कैंसर पीड़ित विधवा मां ने गुहार लगाई है कि एक युवक द्वारा बेटी का तीसरी बार अपहरण किया गया है। याचिका में कहा गया है कि दो माह से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी पुलिस उसकी बेटी को तलाश नहीं पाई है। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस डीडी बंसल की युगलपीठ से शासकीय अधिवक्ता को जवाब पेश करने के लिए एक दिन का समय प्रदान करते हुए लापता युवती को पेश करने आदेश जारी किए हैं।
कैंसर पीड़ित विधवा महिला की तरफ से उक्त बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अर्चना चौहान ने बताया कि आशिक अंसारी नामक युवक पीड़िता की बेटी को बंदूक की नोक पर 24 अप्रैल 2018 को अपने साथ ले गया था। पीड़िता की मां उसे बचाने दौड़ी तो उन्हें हार्ट अटैक आया था, जिसके कारण उनकी मौत हो गई थी। मां की मौत हो जाने के कारण घटना की रिपोर्ट उसने दूसरे दिन दर्ज करवाई थी। घटना के 13 दिन बाद 7 मई 2018 को बेटी लौटी थी और उसने अपने बयान में बताया था कि युवक उसके जबरदस्ती ले गया था और एक कागज में हस्ताक्षर करवाए थे। इसके अलावा युवक ने उसका शारीरिक षोषण भी किया था।
इसके बाद युवक पुनः 14 जुलाई 2018 को मां की हत्या करने की धमकी देते हुए उसकी बेटी ले गया था। युवक ने फोन कर पीड़िता से फिरौती के रूप में 50 हजार रुपये मांगे थे, जिसकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को कटनी से गिरफ्तार कर पीड़िता की बेटी को छुड़ाया था। आरोपी युवक 27 मई 2022 को पुन: घर से उसकी बेटी का अपहरण कर ले गया। दो माह का समय गुजर जाने के बावजूद भी पुलिस उसकी बेटी को तलाश नहीं कर पाई है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिका पर अगली सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित की गयी है।