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MP High Court: जांच कमेटी ने पेश की फर्जी रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा

Wed, 27 Jul 2022 08:30 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि ग्वालियर हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने दो ऐसे कॉलेज को क्लीन चीट प्रदान कर दी है, जिसके फैक्लटी दूसरे कॉलेज में पढ़ाते हैं। कोर्ट ने डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन तथा रजिस्ट्रार नर्सिंग काउंसिल से हलफनामा मांगा है।
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court new - फोटो : istock
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में संचालित फर्जी नर्सिंग कॉलजों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से ग्वालियर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए जांच के लिए कमेटी बनाने का आग्रह किया गया। याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई। हाईकोर्ट को बताया कि ग्वालियर हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने दो ऐसे कॉलेज को क्लीन चीट प्रदान कर दी है, जिसके फैक्लटी दूसरे कॉलेज में पढ़ाते हैं। जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता की आपत्ति पर डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन तथा रजिस्ट्रार नर्सिंग काउंसिल से हलफनामा मांगा है।
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लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।

याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि किस कॉलेज के कितने पेज के दस्तावेज हैं, इसका उल्लेख किया जाता है। हाईकोर्ट में पेष किए गए 453 नर्सिंग कॉलेज के दस्तावेजों में 37759 पेश गायब हैं। 80 कॉलेज ऐसे हैं, जिसमें एक व्यक्ति उसी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य था और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर थी। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने युगलपीठ को बताया कि पेन ड्राइव में उपलब्ध करवाया गया डाटा पूरा नहीं है। कौंसिल की तरफ से पूरा डाटा उपलब्ध करवाने की बात कही गई। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया कि ग्वालियर खंडपीठ ने अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले नर्सिंग कॉलेज की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। इस प्रकार जांच के लिए एक कमेटी घटित कर दी जाए। याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए बताया कि कमेटी ने सौफिया नर्सिंग कॉलेज तथा पिताम्बरा नर्सिंग कॉलेज को क्नील चीट दी थी। इस दौरान कॉलेज के फैक्लटी दूसरे कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद भी नर्सिंग काउंसिल ने उनका एफिलेशन रिन्यू कर दिया है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिका पर अगली सुनवाई 16 अगस्त को निर्धारित की गई है। युगलपीठ को बताया कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पक्ष रखा।
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