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Jabalpur: एसीआर नहीं होने से जूनियर को पहले मिला प्रमोशन, हाईकोर्ट ने विभाग पर लगाई एक लाख की कॉस्ट

Wed, 31 Jan 2024 08:25 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर

सार

कनिष्ठों को वरिष्ठों से पहले पदोन्नति देने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। कंपनी पर एक लाख की कॉस्ट लगाई गई है। कोर्ट ने माना की विभाग की गलती से कर्मचारी का नुकसान हुआ है। 
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MP High Court - फोटो : file photo
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विस्तार
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एसीआर प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण जूनियर को पहले प्रमोशन प्रदान कर दिया गया। एसीआर प्रस्तुत करने पर उसे प्रमोशन तो मिला, परंतु उसकी वरिष्ठता प्रभावित हो गई। इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल ने याचिकाकर्ता को वरिष्ठता सहित अन्य लाभ प्रदान करने के आदेश दिए हैं। एकलपीठ ने विभाग पर एक लाख की कॉस्ट लगाते हुए उक्त राशि याचिकाकर्ता को वाद व्यय के रूप में प्रदान करने के आदेश भी दिए हैं।
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याचिकाकर्ता संतोष कुमार श्रीवास्तव की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसकी नियुक्ति सितंबर 1977 में विद्युत विभाग में टेस्टिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 में पद पर हुई थी। इसके बाद उसे साल टेस्टिंग असिस्टेंट ग्रेड 1 के पद पर प्रमोशन मिला था। उसकी पदस्थापना ट्रांसमिशन कंपनी में कर दी गई थी। प्रमोशन के लिए अक्टूबर 2010 में विभागीय डीपीसी आयोजित की गई थी। उनकी वरिष्ठता क्रम सात था, परंतु एसीआर रिपोर्ट नहीं होने के कारण वरिष्ठता क्रम में 21 तथा 40 वां स्थान रखने वालों को प्रमोशन प्रदान किया गया। एसीआर प्रस्तुत करने के बाद उसे नवंबर 2010 को प्रमोशन प्रदान किया गया।

इसके कारण उसके जूनियर उससे वरिष्ठ हो गए। इस संबंध में उसने विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया था। विभाग द्वारा न्याय उचित कारण बताए बिना ही उसके अभ्यावेदन को खारिज कर दिया गया। इसके कारण उक्त याचिका दायर की गई है। एकलपीठ ने उक्त निर्देश जारी करते हुए अपने आदेश में कहा है कि एसीआर प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी विभाग की थी। विभाग की गलती से याचिकाकर्ता को देर से प्रमोशन मिला था, जबकि उसकी कोई गलती नहीं थी।
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