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6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या: हाईकोर्ट ने फांसी की सजा रद्द की, अब ताउम्र जेल में रहेगा दोषी

Sun, 10 May 2026 09:06 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने 6 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने नर्मदापुरम जिला न्यायालय द्वारा आरोपी अजय वाडिवा को दी गई फांसी की सजा को रद्द करते हुए उसे आजीवन कारावास (उम्रकैद) में बदल दिया है।
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हाईकोर्ट ने फांसी की सजा रद्द की - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या के दोषी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि दोषी को कम से कम 25 साल तक किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी और उसे अपनी अंतिम सांस तक जेल में ही रहना होगा।

क्यों बदली गई फांसी की सजा?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला 'विरल से विरलतम' (Rare of Rarest) की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट के अनुसार, सजा तय करते समय केवल अपराध की क्रूरता को ही आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके साथ ही आरोपी की सामाजिक पृष्ठभूमि, उसका व्यवहार और भविष्य में उसके सुधरने की संभावनाओं पर विचार करना भी कानूनी रूप से जरूरी है। अदालत ने माना कि आरोपी को सुधरने का एक मौका दिया जाना चाहिए।

घटना का पूरा ब्यौरा

यह मामला 2 जनवरी 2025 का है। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा थाना क्षेत्र के एक गांव से 6 साल की बच्ची अचानक लापता हो गई थी। पुलिस ने संदेह के आधार पर अजय वाडिवा नाम के युवक को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान अजय ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह बच्ची को नहर किनारे झाड़ियों में ले गया और उसके साथ गलत काम किया। जब बच्ची चिल्लाने लगी, तो उसने उसका गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

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निचली अदालत ने दी थी मौत की सजा

नर्मदापुरम जिला सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 अप्रैल 2025 को अजय वाडिवा को दोषी करार दिया था और उसे फांसी की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। अपील में दलील दी गई थी कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और डीएनए रिपोर्ट भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों से यह साबित होता है कि आरोपी ने ही यह घिनौना कृत्य किया है। आरोपी का कृत्य वासना से भरा था और उसने मासूम की निजता का उल्लंघन किया, जो समाज के माथे पर कलंक है। हालांकि, आरोपी की 'सोशल ऑडिट रिपोर्ट' और मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलना उचित समझा। अब दोषी अजय वाडिवा को मृत्युपर्यंत जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा।

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