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MP High Court: हाईकोर्ट ने दोहरे मृत्युदंड की सजा को किया रद्द, सिंगरौली जिला कोर्ट का फैसला बदला

Mon, 05 Dec 2022 10:33 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

अपर जिला सत्र न्यायाधीश सिंगरौली ने आरोपी रामजग बिंद को वृद्ध दंपती की हत्या के आरोप में नवंबर 2019 को दोहरे मृत्युदंड की सजा से दंडित किया था। हाईकोर्ट ने सोमवार को जारी फैसले में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश के फैसले को खारिज करने के आदेश जारी है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वृद्ध दंपती की हत्या के मामले में जिला न्यायालय सिंगरौली द्वारा दिए गए दोहरे मृत्युदंड की सजा को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस पीसी गुप्ता की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि परिस्थितिजनक साक्ष्य उत्तम गुणवत्ता के होने चाहिए। अभियोजन पक्ष स्पष्ट व परिस्थितिजनक साक्ष्यों की शृंखला प्रस्तुत नहीं कर पाया। अनुमानों के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
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बता दें कि अपर जिला सत्र न्यायाधीश सिंगरौली ने आरोपी रामजग बिंद उम्र 38 को 97 साल के वृद्ध रिश्तेदार तथा 95 साल की उसकी पत्नी की हत्या के आरोप में नवंबर 2019 को दोहरे मृत्युदंड की सजा से दंडित किया था। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए जिला न्यायालय ने प्रकरण को हाईकोर्ट भेजा था। इसके अलावा आरोपी ने भी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने युगलपीठ को बताया कि घटना को कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। सिर्फ परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोहरे मृत्युदंड की सजा से दंडित किया गया है।

खुशवई ग्राम वृद्ध दंपती 25 अप्रैल 2014 से गायब थे और उनके बेटे ने 30 अप्रैल 2014 को उनके गायब होने की रिपोर्ट मोरवा थाने में दर्ज करवाई थी। दोनों के शव उसी दिन गांव के कुएं में मिले थे। कुएं के अंदर पत्थर थे और दोनों के शरीर में चोट के निशान थे। कुएं में किसी प्रकार की मेड़ नहीं थी। आरोपी के पास जो कुल्हाड़ी जब्त की गई, उसमें खून के धब्बे नहीं पाए गए। गवाह के अनुसार वृद्ध दंपती के लापता होने के पूर्व आरोपी को उनके साथ देखा गया था। घटना के संबंध में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और अपर्याप्त परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर उसे दोनों की हत्या के आरोप में दोहरे मृत्युदंड की सजा से दंडित किया गया है। 
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सरकार की तरफ से बताया गया कि आरोपी ने साल 1997 में एक महिला सहित पांच व्यक्तियों की हत्या की थी। जिला न्यायालय ने उसे मृत्युदंड की सजा से दंडित किया था, जो बाद में आजीवन कारावास की सजा में तब्दील कर दिया गया था। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद 23 नवंबर को फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने सोमवार को जारी फैसले में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश के फैसले को खारिज करने के आदेश जारी है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अपीलकर्ता अन्य अपराध में न्यायिक अभिरक्षा में नहीं है तो उसे रिहा किया जाए। कोर्ट मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने पैरवी की।
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