हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बावजूद भी प्रदेश में एनजीटी के निर्देश में गठित हाई पॉवर कमेटी की अनुमति के बिना पेड़ों को काटे जाने का मुद्दा चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष उठाया गया। याचिकाकर्ताओं की तरफ से बताया गया कि अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ शहरी क्षेत्रों के लिए है। युगलपीठ ने पक्षकारों को निर्देशित किया है कि आदेश पूरे प्रदेश के लिए है। ग्रामीण क्षेत्र में बिना अनुमति पेड़ काटे जा रहे हैं तो वह अवमानना याचिका दायर करने स्वतंत्र है।
राजधानी भोपाल के पास भोजपुर-बैरसिया सड़क निर्माण के लिए बिना अनुमति के ही सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई कर रही है। संज्ञान याचिका के साथ अन्य संबंधित याचिकाओं की सुनवाई संयुक्त रूप से हाईकोर्ट कर रहा है। पूर्व के हाईकोर्ट ने एनजीटी द्वारा गठित हाई-पॉवर कमेटी की अनुमति बिना प्रदेश में एक भी पेड़ नहीं काटने के आदेश जारी किए थे।
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अधिवक्ता ब्रम्हेन्द्र पाठक ने बताया कि याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बावजूद भी प्रदेश में पेड़ों की कटाई जारी है। इस संबंध में अभ्यावेदन भी संबंधित अधिकारियो को दिए गए हैं। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नहीं है। युगलपीठ ने निर्देश दिए हैं कि आदेश पूरे प्रदेश के लिए है। बिना अनुमति पेड़ काटे जा रहे हैं तो इस संबंध में वह अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं। युगलपीठ को बताया गया कि सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक के पेड़ की काटे जाने के मामले की सुनवाई एनजीटी स्वत: संज्ञान लेकर कर रही है। जिस पर अगली सुनवाई 8 मार्च को निर्धारित है।