छिंदवाड़ा के चर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में 30 बच्चों की मौत के मामले में मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने उनकी दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हिरासत की अवधि के अलावा मामले की परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया है, इसलिए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
गौरतलब है कि इससे पहले भी हाईकोर्ट डॉ. प्रवीण सोनी की पहली जमानत याचिका खारिज कर चुका है। उस समय अदालत ने कहा था कि 30 मासूम बच्चों की मौत का मामला अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है। यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।
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अधिसूचना के बाद भी लिखी दवा
अदालत ने अपने पूर्व आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि केंद्र सरकार की अधिसूचना के बावजूद आरोपी डॉक्टर चार वर्ष से कम आयु के बच्चों को फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) कफ सिरप लिखता रहा। सरकारी प्रयोगशाला और औषधि विभाग की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि संबंधित कफ सिरप में 46.28 प्रतिशत डायथिलीन ग्लाइकॉल मौजूद था, जबकि भारतीय फार्माकोपिया के अनुसार इसकी अनुमेय सीमा केवल 0.1 प्रतिशत है। डायथिलीन ग्लाइकॉल एक अत्यंत विषैला रसायन है, जो विशेष रूप से बच्चों की किडनी के लिए घातक माना जाता है।
सारा खेल कमीशन का
अदालत ने यह भी कहा था कि चेतावनी मिलने के बावजूद आरोपी डॉक्टर यह कफ सिरप लिखता रहा, जिसके कारण चार से पांच वर्ष तक की आयु के 30 बच्चों की मौत हो गई। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि आरोपी को यह दवा लिखने के एवज में कमीशन मिलता था। दूसरी जमानत याचिका में डॉ. प्रवीण सोनी की ओर से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। वे 5 अक्टूबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। उनका कफ सिरप के निर्माण से कोई संबंध नहीं है और पुलिस न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत कर चुकी है। चूंकि ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा, इसलिए उन्हें नियमित जमानत का लाभ दिया जाए।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि पहली जमानत याचिका खारिज होने के बाद से मामले की परिस्थितियों में कोई नया या महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए दूसरी जमानत याचिका भी निरस्त की जाती है।