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फर्जी पत्र मामले में हाईकोर्ट सख्त: राजस्थान पुलिस को लगाई फटकार, 29 अप्रैल तक हर हाल में पेश होने के निर्देश

Mon, 27 Apr 2026 09:13 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मप्र हाईकोर्ट ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत मामले में राजस्थान पुलिस को फटकार लगाते हुए 29 अप्रैल को हर हाल में उन्हें कोर्ट में पेश करने के सख्त आदेश दिए हैं। अदालत ने देरी पर नाराजगी जताई।

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जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मप्र हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संज़ीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने पूर्व निर्देश के बावजूद मध्य प्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को पेश नहीं किए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने राजस्थान पुलिस को फटकार लगाते हुए 29 अप्रैल को हर हाल में भोपाल से गिरफ्तार तीनों युवकों को न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं।

मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल हुए फर्जी पत्र से जुड़ा है। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच के सहयोग से राजस्थान पुलिस ने मप्र कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था।

तीनों की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए भोपाल निवासी खिजर खान की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि 20 अप्रैल 2026 की तड़के करीब 3 बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, भोपाल में निखिल, बिलाल और इनाम को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और उन्हें दो दिनों तक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।

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राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था और बाद में उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद अगले दिन फिर उन्हें साइबर सेल बुलाकर राजस्थान पुलिस को सौंप दिया गया।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से इस दलील को झूठा और मनगढ़ंत बताया गया। उनका कहना था कि आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद न तो मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और न ही ट्रांजिट रिमांड लिया गया।

पूर्व में सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने भोपाल के जहांगीराबाद स्थित पुलिस परिवहन एवं अनुसंधान संस्थान के 20 अप्रैल 2026 के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने और तीनों कार्यकर्ताओं को 27 अप्रैल को न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए थे। सोमवार को हुई सुनवाई में ‘मिस कम्युनिकेशन’ का तर्क दिया गया, जिस पर कोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए सख्त निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एच.एस. छाबड़ा ने पक्ष रखा।

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