लोकतंत्र सेनानी मीसा बंदी की पत्नी के उपचार पर किए गए व्यय की राशि शासन ने इस आधार पर निरस्त कर दी कि संबंधित महिला की मृत्यु हो चुकी है। इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए जबलपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 30 दिन के भीतर विचार कर नियमानुसार आदेश पारित करें।
यह याचिका आदर्श नगर, ग्वारीघाट रोड निवासी अजीत सिंह आनंद ने दायर की थी। उन्होंने बताया कि वह पेशे से ड्राइवर हैं और उनकी मां हरजीत कौर का निधन दिसंबर 2023 में हो गया था। वह लकवे और हृदय रोग से पीड़ित थीं। उनके पति स्व. सरकार भगत सिंह लोकतंत्र सेनानी थे। उनके निधन के बाद हरजीत कौर को मीसाबंदी पेंशन मिलती थी।
याचिका में कहा गया कि शासन का स्पष्ट प्रावधान है कि मीसाबंदी या उनकी पत्नी को गंभीर बीमारी की स्थिति में चिकित्सा सहायता अनुदान दिया जाएगा। पहले भी जब उनकी मां बीमार थीं, तब उनके इलाज पर हुए खर्च की भरपाई शासन द्वारा की गई थी।
पढ़ें: पुलिस चौकी पर ग्रामीणों का हमला, जमकर की तोड़फोड़; हत्या का मामला दर्ज करने की कर रहे थे मांग
अक्टूबर 2023 में उनकी तबीयत फिर बिगड़ी और उन्हें लकवा तथा दिल का दौरा पड़ा, जिसके चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अजीत सिंह ने जिला कलेक्टर से चिकित्सा अनुदान के लिए आवेदन किया। उन्होंने दावा किया कि कलेक्टर ने मौखिक रूप से इलाज का खर्च वहन किए जाने का आश्वासन दिया था, जिसके आधार पर उन्होंने कर्ज लेकर मां का उपचार कराया। परंतु इलाज के दौरान 18 दिसंबर 2023 को उनकी मां का निधन हो गया।
बाद में शासन ने मृत्यु का हवाला देते हुए चिकित्सा अनुदान राशि देने से इनकार कर दिया। इस पर अजीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपना पक्ष स्वयं रखा। न्यायालय ने याचिका का निराकरण करते हुए कलेक्टर को 30 दिनों में उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।