पैथोलॉजी केंद्रों में मानक गुणवत्ता के केमिकल का उपयोग न किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका की सुनवाई के दौरान अनावेदकों की तरफ से पूर्व में पारित आदेश का परिपालन करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अनावेदकों को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
जबलपुर निवासी अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि पैथोलॉजी केंद्रों में विभिन्न परीक्षणों के लिए केमिकल का उपयोग किया जाता है। परीक्षणों की शुद्धता के लिए उपयोग किए जाने वाले केमिकल उच्च कोटि यानी मानक गुणवत्ता के होने चाहिए, जिससे लैब की परीक्षण रिपोर्ट विश्वसनीय हो। केमिकल की मानक गुणवत्ता निर्धारित करने के लिए साल 2009 में एक आयोग गठित किया गया था। लेकिन, कई साल गुजर जाने के बावजूद भी मानक का निर्धारण नहीं किया गया है। पैथोलॉजी केंद्रों में अमानक केमिकल से जांच होने पर अपेक्षाकृत विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आती हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
याचिका में कहा गया था कि पैथोलॉजी केंद्रों को एनएबीएल से सम्बद्धता लेनी होती है। मध्य प्रदेश में वर्ष 2017 की स्थिति में मात्र 17 पैथोलॉजी केंद्र एनएबीएल से सम्बद्ध थे। कालांतर में यह संख्या बढ़कर केवल 49 हुई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी कितनी बड़ी संख्या में असंबद्ध पैथोलॉजी केंद्र संचालित हो रहे हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने मध्य प्रदेश में एनएबीएल से मान्यता प्राप्त पैथोलॉजिकल प्रयोगशालाओं की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए थे। इसके अलावा, पैथोलॉजिकल प्रयोगशालाओं को एनएबीएल से मान्यता प्रदान करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए गए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पूर्व में पारित आदेश पर रिपोर्ट पेश करने के लिए समय प्रदान किया है। याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा।