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MP News: नर्सिंग काउंसिल दफ्तर से CCTV फुटेज गायब, हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर और साइबर सेल को जांच सौंपी

Sat, 25 Jan 2025 04:51 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्यप्रदेश में चल रहे नर्सिंग घोटाले में सीबीआई की जांच के बाद जहां 500 से अधिक नर्सिंग कॉलेजों पर ताले लग चुके हैं। वहीं, अब नर्सिंग काउंसिल में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। 
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में नया मोड़ आया है। एमपीएनआरसी के रजिस्ट्रार की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज का डेटा उपलब्ध नहीं है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए तल्ख टिप्पणी करते हुए अपने आदेश में कहा है कि रजिस्ट्रार कोर्ट के साथ लुका-छुपी का खेल खेल रहे हैं। युगलपीठ ने पुलिस आयुक्त भोपाल तथा साइबर सेल प्रभारी को निर्देशित किया है कि सीसीटीवी फुटेज को पुनः प्राप्त करने सभी संभावित प्रयास करें। याचिका पर अगली सुनवाई 31 जनवरी को निर्धारित की गई है।

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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित किये जाने को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में आवेदन पेश कर कहा था कि नर्सिंग घोटाले की अनियमितता में लिप्त एक इंस्पेक्टर को काउंसिल का रजिस्ट्रार बनाया गया था। इसके अलावा तत्कालीन निदेशक को अध्यक्ष बना दिया है। दोनों अधिकारी महत्वपूर्ण पद में रहते हुए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया था कि काउंसलिंग की वर्तमान रजिस्ट्रार अनीता चंद्र ने भोपाल के एक नर्सिंग कॉलेज की निरीक्षण रिपोर्ट इंस्पेक्टर के तौर पर पेश की थी, जिसके आधार पर कॉलेज को मान्यता दी गई थी। जांच में उक्त कॉलेज आयोग्य पाया गया और उसकी मान्यता निरस्त की गई। इसी प्रकार वर्तमान अध्यक्ष जितेश चंद्र शुक्ला उस समय काउंसलिंग के निर्देशक थे। युगलपीठ ने दोनों अधिकारियों को तत्काल हटाने के आदेश जारी किए हैं।

याचिका पर पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने युगलपीठ को बताया था कि आदेश के बावजूद भी दोनों अधिकारियों को हटाया नहीं गया है। काउंसलिंग कार्यालय से रजिस्ट्रार चार बक्से कागजात लेकर गई है। रजिस्ट्रार ने पद से हटाने जाने के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। सरकार इसका इंतजार कर रही है कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से किसी प्रकार की राहत मिल जाए। आदेश के बावजूद भी दोनों अधिकारियों को पद से नहीं हटाये जाने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की, जिसके बाद सरकार ने 24 घंटे में दोनों अधिकारियों को हटाये जाने का आश्वासन युगलपीठ को दिया था।
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याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार की तरफ से सीसीटीवी फुटेज के संबंध में उक्त जानकारी पेश की गई। युगलपीठ ने जिसे गंभीरता से लेते हुए कहा है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में 13 दिसंबर से 19 दिसंबर तक के सीसीटीवी फुटेज का डेटा सुरक्षित रखने आदेश जारी किये हैं। तत्कालीन रजिस्ट्रार को अनियमितताओं के आरोप ने पद से हटाने के निर्देश जारी किये गये थे। युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार के फोन लोकेशन की जानकारी भी प्राप्त करने के आदेश जारी किये हैं, जिससे उनकी कार्यालय में भौतिक उपस्थित सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा आसपास में लगे सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आपराधिक ने वास्तविकता में क्या-क्या चुराया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि सीबीआई की रिपोर्ट में आधार पर साल 2002-23 में जीएनएम पाठ्यक्रम में प्रवेश की अनुमति नहीं होने के बावजूद भी रजिस्ट्रार के आदेश पर जिन छात्रों को दाखिला दिया गया, उनके नामांकन के संबंध में जानकारी पेश करें। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।  

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