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MP High Court: विदेश से मंगवाई गई है हाथी के लिए कॉलर आईडी, जानें क्या है पूरा मामला

Mon, 14 Oct 2024 08:01 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ से जंगली हाथियों के झुंड मध्यप्रदेश के जंगलों में प्रवेश करते हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और घरों में तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन महीने में पहले जंगली हाथी को छोड़ा जाएगा। हाथी के लिए विदेश से कॉलर आईडी मंगवाई गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार से पूछा है कि किस आदेश के तहत जंगली हाथियों को पकड़कर प्रशिक्षण शिविर में रखा गया है। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की है।

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रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ से जंगली हाथियों के झुंड मध्यप्रदेश के जंगलों में प्रवेश करते हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और घरों में तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। कुछ मामलों में जंगली हाथियों द्वारा किए गए हमलों में लोगों की मौत भी हो चुकी है। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट (पीसीसीएफ) वाइल्ड लाइफ के आदेश पर ही इन हाथियों को पकड़ा जा सकता है। जंगली हाथी संरक्षित वन्य प्राणियों की प्रथम सूची में आते हैं और पकड़े जाने के बाद उन्हें टाइगर रिजर्व में भेजकर प्रशिक्षण दिया जाता है।

ट्रेनिंग के दौरान हाथियों को यातनाओं का सामना करना पड़ता है, जो कि केंद्रीय पर्यावरण विभाग की गाइड लाइन्स के अनुसार जंगली हाथियों को पकड़ने का कदम अंतिम उपाय के रूप में होना चाहिए। लेकिन मध्यप्रदेश में इसे पहले विकल्प के रूप में अपनाया जा रहा है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए।
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सरकार की तरफ से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है, जिसमें से दो हाथियों की मौत हो गयी है। साल 2024 में दो हाथियों को पकड़ा गया था। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गई। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार से पूछा है कि किस आदेश के तहत हाथियों को पकड़कर प्रशिक्षण केन्द्र में रखा गया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।

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