भोपाल गैस त्रासदी के मुआवजा से जुड़े मामलों में सरकार के स्वास्थ्य विभाग को पक्षकार नहीं बनाने के मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमठ व जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने मामले में मुआवजे से जुड़े सभी प्रकरणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को आवश्यक रूप से पक्षकार बनाने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई तीन अप्रैल को निर्धारित की है।
यह मामला भोपाल निवासी गुलजान की ओर से दायर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वह और उनका परिवार भी गैस पीड़ित हैं। गैस रिसाव के कारण हुई बीमारी का इलाज भी हुआ और संबंधित डॉक्टर ने भी इस संबंध में गवाही दी थी। इसके बावजूद उन्हें पीड़ित वर्ग में शामिल नहीं किया गया और आयुक्त कल्याण भोपाल गैस पीडि़त ने उनका मुआवजा का दावा निरस्त कर दिया।
इस मामले में आयुक्त को पक्षकार बनाया गया था, जिस पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई। न्यायालय ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजा देने का काम राज्य शासन का है। इसलिए राज्य के संबंधित विभाग प्रमुख को आवश्यक पक्षकार बनाना जरूरी है। युगलपीठ ने आयुक्त भोपाल गैस पीड़ित कार्यालय से मुआवजे के जितने भी मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं, उन सभी में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को पक्षकार बनाने के निर्देश दिये हैं।