हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद ट्रायल कोर्ट के रीडर की त्रुटि के कारण आरोपी जीशान खान को 12 दिन अतिरिक्त जेल में रहना पड़ा। इस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रीडर को दस्तावेज स्पेशल जज के सामने प्रस्तुत करने चाहिए थे।
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद ट्रायल कोर्ट के रीडर की गलती के कारण आरोपी को 12 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। हाईकोर्ट के जस्टिस एके सिंह की एकलपीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि रीडर द्वारा अपनाया गया तरीका सही नहीं था।
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गौरतलब है कि जबलपुर की हनुमान ताल थाना पुलिस ने आरोपी जीशान खान के खिलाफ एससी एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। आरोपी उक्त अपराध में विगत 10 जुलाई 2025 से न्यायिक अभिरक्षा में है। हाईकोर्ट से आरोपी को उक्त अपराधिक प्रकरण में विगत 18 फरवरी 2026 को जमानत मिल गई थी। आरोपी की तरफ से 20 फरवरी को जमानत के दस्तावेज ट्रायल कोर्ट के स्पेशल जज की अदालत में प्रस्तुत किए गए थे। रीडर ने हाईकोर्ट के आदेश में एक धारा का उल्लेख नहीं किए जाने की त्रुटि निकालते हुए उसे स्पेशल जज के समक्ष प्रस्तुत नहीं करते हुए सुधार कार्य करवाने के लिए वापस कर दिया। इसके बाद जमानत आदेश में सुधार के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है कि जमानत ऑर्डर में यदि कुछ कमी थी तो उनका फर्ज था कि वे कागजात स्पेशल जज के सामने प्रस्तुत करें। स्पेशल जज को कानूनी ऑर्डर पास करना चाहिए। किसी केस में जरूरी बातें केस नंबर होता है, जिसका जिक्र आदेश में था। इसके अलावा क्राइम नंबर और आरोपी के नाम का उल्लेख भी आदेश में था। आदेश आरोपी और उस केस की पहचान करने के लिए काफी था। एकलपीठ ने उक्त आदेश को पूर्व में पारित आदेश के साथ पढ़ने के निर्देश जारी किए हैं।